Rahul Gandhi React On UPI Payment Charges: भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके UPI को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मोदी सरकार ने 2000 से ज्यादा UPI Payment पर चार्ज लगाने का ऐलान किया है। नया नियम 15 अक्टूबर से लागू हो जाएगा। वहीं देश में डिजिटल भुगतान की सबसे बड़ी पहचान बन चुके यूपीआई को लेकर अब सियासत गरमा गई है। ₹2000 से ज्यादा यूपीआई पेमेंट पर चार्ज लगाने को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा कि मोदी ने ट्रंप के आगे सरेंडर कर दिया है। राहुल गांधी का दावा है कि इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों की जेब पर ही आएगा।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है। अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है।

लोकसभा नेता प्रतिपक्ष ने आगे लिखा- सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से। अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है। US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला

दरअसल सरकार ने ₹2,000 तक के यूपीआई भुगतान पर किसी तरह का शुल्क लगाने की अनुमति नहीं है, लेकिन नई व्यवस्था में ₹2,000 से ऊपर के व्यापारी भुगतानों पर शुल्क लगाने की संभावना का रास्ता खुल गया है। इसकी अधिसूचना जारी हो गई है। हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर ग्राहक से सीधे शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो फिर शुल्क देगा कौन?इसको लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम और बैंकिंग क्षेत्र के बीच हुई शुरुआती चर्चा में बड़े व्यापारी भुगतानों पर करीब 0.4 प्रतिशत शुल्क की संभावना की बात सामने आई है। इसे उदाहरण से समझिए. अगर किसी ग्राहक ने किसी व्यापारी को यूपीआई से ₹10,000 का भुगतान किया और शुल्क 0.4 प्रतिशत हुआ, तो शुल्क ₹40 बैठेगा, लेकिन यह सिर्फ संभावित दर है। अभी यह तय नहीं है कि शुल्क वास्तव में कितना होगा।

सरकार क्या कह रही है

इसे लेकर केंद्र सरकार का रुख साफ है। सरकार का कहना है कि आम यूपीआई उपयोगकर्ता से लेनदेन शुल्क लेने की कोई योजना नहीं है। ₹2,000 तक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क नहीं लगेगा। दो व्यक्तियों के बीच होने वाले भुगतान भी निशुल्क रहेंगे। सरकार के मुताबिक, बड़े व्यापारी भुगतानों पर अगर कोई शुल्क व्यवस्था आती भी है तो उसका उद्देश्य यूपीआई उपयोगकर्ता पर सीधा बोझ डालना नहीं, बल्कि पूरी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाना है।

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