शब्बीर अहमद, भोपाल। राजधानी भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर “वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” करने के प्रस्ताव आने के बाद नई बहस छिड़ गई है। प्रस्ताव में कहा गया है की राजा भोज का योगदान क्षेत्र के लिए बड़ा है, जबकि बरकतउल्ला भोपाली का सिर्फ भोपाल निवासी होना ही जुड़ाव है। इसी तर्क के आधार पर कार्य परिषद की बैठक में न बदलने का फैसला हुआ। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन का प्रस्ताव चर्चा में है। नया नाम “वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” सुझाया गया है प्रस्ताव में राजा भोज के योगदान गिनाए गए हैं। दावा है कि उन्होंने 80 ग्रंथ लिखे, जिनमें 27 आज भी उपलब्ध हैं। धार को ज्ञान का केंद्र बनाया और भोजशाला यानी सरस्वती मंदिर की स्थापना की, भोजताल और भोजपुर भी उनसे जुड़े हैं।
मौलाना बरकतउल्ला और राजा भोज की तुलना
कार्य परिषद की बैठक में रखे गए प्रस्ताव में मौलाना बरकतउल्ला भोपाली और राजा भोज की तुलना की गई है। लिखा गया की भोपाल में बरकतउल्ला के क्षेत्र के लिए योगदान नजर नहीं आते। बरकतउल्ला भोपाली गदर आंदोलन से जुड़े क्रांतिकारी थे। उन्होंने विदेश में रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ अभियान चलाया और आजादी की लड़ाई को वैश्विक समर्थन दिलाया।उन्हीं के सम्मान में भोपाल यूनिवर्सिटी का नाम बदला गया था।
अर्जुन सिंह ने लिया था नाम बदलने फैसला
भोपाल विश्वविद्यालय का नाम 1988 में बदलकर बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय किया गया था। उस वक्त कांग्रेस पार्टी की सरकार थी मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने नाम बदलने फैसला लिया था। कार्य परिषद के प्रस्ताव के बाद अब राजा भोज बनाम बरकतउल्ला की ये बहस सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रही। विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव आने के बाद अब इस पर नई बहस छिड़ गई है। क्या राजा भोज का भोपाल के लिये योगदान ज्यादा था ये फिर या फिर बरकतुल्लाह का।

