आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। बहुचर्चित झीरम हत्याकांड मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष ने NIA कोर्ट में अपनी-अपनी दलीलें रख चुके हैं। ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में आने वाले इस मामले में एनआईए कोर्ट के न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत आज शाम 4.30 बजे सजा सुनाएंगे। इस जघन्य हत्याकांड में दोषी ठहराए गए आरोपियों को क्या सजा मिलती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई कि झीरम हत्याकांड में 27 लोगों की जान गई थी, जिनमें राजनीतिक नेता, सुरक्षा कर्मी और आम नागरिक शामिल थे। अभियोजन के मुताबिक यह हमला अचानक नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित षड्यंत्र, रेकी और योजना के तहत किया गया था। जानबूझकर गोली चलाई गई और हमले में घायल लोगों तथा उनके परिवारों को भी गंभीर नुकसान उठाना पड़ा।

अभियोजन ने आरोपियों को अधिकतम सजा दिए जाने की मांग करते हुए मृत्युदंड और न्यूनतम आजीवन कारावास की दलील रखी। अभियोजन पक्ष के सहयोगी अधिवक्ता संजय शुक्ला ने कहा कि आरोपियों पर लगाई गई धाराओं के तहत सजा दी जानी चाहिए। उनका तर्क था कि यदि आरोपी नक्सलियों के दबाव में काम करने की बात कह रहे हैं तो उसके समर्थन में कोई गवाह क्यों पेश नहीं किया गया। उन्होंने यह भी दलील दी कि नक्सलियों तक राशन पहुंचाने से उन्हें ताकत मिली और अपराध की योजना को मदद मिली।
वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने मृत्युदंड का विरोध किया। उनका कहना था कि आरोपी करीब 12 साल से सजा भुगत चुके हैं, उनके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ और वे ग्रामीण हैं। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी नक्सलियों के दबाव में काम कर रहे थे, और उन्हें सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए। बचाव पक्ष ने न्यूनतम सजा देने और अब तक भुगती गई सजा को देखते हुए शेष सजा में राहत देने की मांग की।
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