पश्चिम बंगाल विधानसभा ने काफी देर के बाद आखिरकार पार्टी छोड़ने वाले 10 तृणमूल विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की है. विधानसभा ने नोटिस का चाबुक चलाते हुए बागी गुट से जुड़े 10 विधायकों से एक हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है. इस कदम से सदन में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम, अरूप रॉय और जावेद खान जैसे बड़े क्षत्रपों की विधानसभा सदस्यता पर तलवार लटक गई है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने TMC के 10 बागी विधायकों को नोटिस भेजा है और एक हफ्ते के अंदर जवाब तलब किया है.
पश्चिम बंगाल में बागी विधायकों को नोटिस मिलने से सियासत फिर गरमा गई है. TMC पार्टी में हुई टूट के बाद ममता बनर्जी गुट की याचिका पर बड़ा एक्शन लेते हुए विधानसभा सचिवालय ने बागी गुट के 10 कद्दावर विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए इन सभी से सात दिनों के भीतर लिखित जवाब तलब किया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते क्यों न उनकी विधायकी रद्द कर दी जाए.
विधानसभा की तरफ से जिन विधायकों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें सदन में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के अलावा अरूप रॉय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुजमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष शामिल हैं.
विधानसभा स्पीकर ने ये नोटिस एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग वाली शिकायतों के आधार पर जारी किए हैं. उन्हें जवाब देने के लिए सात दिन की डेडलाइन दी गई है. इस कदम ने पार्टी पर नियंत्रण को लेकर दोनों गुटों के बीच जारी तीखी लड़ाई को औपचारिक कार्यवाही में बदल दिया है.
TMC ने ‘दलबदलू’ विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग स्पीकर को लेटर लिखकर की थी, जिस पर कोई भी कारवाई न होने पर ममता खेमे द्वारा सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक रिट पिटीशन फाइल की गई. इस केस के फाइल होने के कुछ ही समय बाद खबर आई कि स्पीकर ने सात दिन की डेडलाइन देते हुए एक नोटिस जारी किया.
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