रांची। झारखंड के चतरा जिले के अम्रपाली-मगध कोयला खनन क्षेत्र में लेवी वसूली और प्रतिबंधित तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) के लिए फंड जुटाने के मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में 12 आरोपियों को दोषी करार देते हुए अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई है।
अदालत ने 5 दोषियों को 10 साल के सश्रम कारावास, 6 दोषियों को 8 साल के सश्रम कारावास और एक अन्य दोषी को 5 साल के सश्रम कारावास की सजा दी है। मामला NIA Case RC-06/2018/NIA/DLI से जुड़ा है।
इन 12 दोषियों को मिली सजा
मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों में टीपीसी के सक्रिय सदस्य बिंदेश्वर गंझू उर्फ बिंदू गंझू, लक्ष्मण गंझू उर्फ कोहराम, मुनेश गंझू, बीरबल गंझू, मुकेश गंझू उर्फ मुनेश्वर गंझू, भीखन गंझू उर्फ दीपक गंझू, अनिश्चय गंझू, प्रदीप राम उर्फ प्रदीप वर्मा, विनोद कुमार गंझू, संजय जैन, प्रेम विकास उर्फ मंटू सिंह और सुभान मियां शामिल हैं।
कोयला कारोबारियों से लेवी वसूली का आरोप
मामले की जांच में सामने आया था कि अम्रपाली-मगध क्षेत्र में कोयला खनन और परिवहन से जुड़े कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों, ठेकेदारों और अन्य लोगों से लेवी वसूली की जाती थी।
आरोप के मुताबिक, वसूली गई रकम का इस्तेमाल प्रतिबंधित टीपीसी की गतिविधियों के लिए फंड जुटाने में किया जाता था। संगठन के सदस्य स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों के साथ मिलकर कोयला खनन और परिवहन जारी रखने के बदले रकम वसूलते थे।
एनआईए के अनुसार, टीपीसी के कुछ सशस्त्र कैडर प्रतिबंधित भाकपा-माओवादी से भी जुड़े हुए थे। स्थानीय कमेटियों, कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत के जरिए कोयला खदानों से खनन और परिवहन की गतिविधियों के बदले लेवी वसूली की व्यवस्था संचालित की जा रही थी।
21 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई थी चार्जशीट
एनआईए ने मामले में कुल 21 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था। इनमें 16 आरोपियों के खिलाफ 22 दिसंबर 2018 को चार्जशीट दाखिल की गई थी, जबकि पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ 10 जनवरी 2020 को पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 119 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने 12 आरोपियों को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।


