मुजफ्फरपुर। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बिहार पुलिस के विशेष कार्य बल (STF) और जिला पुलिस के साथ एक संयुक्त और बेहद गोपनीय अभियान के तहत नागालैंड से अवैध हथियार तस्करी मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी भैरव त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई मुजफ्फरपुर जिले के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र में अंजाम दी गई। आरोपी भैरव इसी जिले के अहियापुर का रहने वाला है और उस पर नागालैंड से अत्याधुनिक हथियारों की तस्करी के गंभीर आरोप हैं।
नागालैंड से बिहार में हथियारों की तस्करी का जाल
जांच एजेंसियों के मुताबिक, भैरव त्रिपाठी अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर नागालैंड से बिहार में प्रतिबंधित बोर के हथियार और अत्याधुनिक राइफलें लाने की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल था। इस तस्करी का मुख्य उद्देश्य राज्य की शांति-सुरक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करना और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करना था। आरोपी के खिलाफ एनआईए दिल्ली और बिहार के विभिन्न थानों में हत्या के प्रयास, एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट जैसे कुल आठ संगीन आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं।
क्या है पूरा मामला और कब हुई शुरुआत?
यह पूरा मामला मूल रूप से 7 मई 2024 को मुजफ्फरपुर के फकुली थाना क्षेत्र के मुरघटिया पुल के पास सामने आया था। फकुली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक अत्याधुनिक लेंस लगी AK-47 राइफल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद किए थे, तथा मौके से चार आरोपियों को दबोचा था। मामले की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े तार मिलने के बाद, 5 अगस्त 2024 को एनआईए ने इस केस को अपने हाथ में लेकर जांच शुरू की थी।
एनआईए की अब तक की कार्रवाई और चार्जशीट
एनआईए इस हाई-प्रोफाइल मामले में गहन अनुसंधान करते हुए अब तक तीन पूरक आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है:
- पहला सप्लीमेंट्री चार्जशीट (8 मई 2025): विकास कुमार, सत्यम कुमार, देवमणि राय और अहमद अंसारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 120B तथा यूए(पी) एक्ट की धारा 13 और 18 के तहत दायर।
- दूसरा सप्लीमेंट्री चार्जशीट (20 फरवरी 2026): आरोपी मंजूर खान के खिलाफ आईपीसी, आर्म्स एक्ट (धारा 25(1AA), 26, 35) और यूए(पी) एक्ट के तहत दाखिल।
- तीसरा सप्लीमेंट्री चार्जशीट (15 अप्रैल 2026): आरोपी कुंदन कुमार उर्फ कुंदन भगत के खिलाफ आर्म्स एक्ट और यूए(पी) एक्ट की धाराओं के तहत पेश।
भैरव त्रिपाठी की इस गिरफ्तारी को एनआईए की जांच में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे इस अवैध हथियार तस्करी सिंडिकेट के अन्य बचे हुए नेटवर्क का भी खुलासा होने की पूरी संभावना है।

