कैथल। एनआईआईएलएम विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सूक्ष्मजीव दिवस-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम ‘द इनविजिबल वर्ल्ड, विजिबल इम्पैक्ट’ रखी गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। मंच संचालन डॉ. नीता कौशिक ने किया, जबकि डीन डॉ. रिचा मोर ने स्वागत भाषण दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) आर.सी. कुहाड़ रहे। अपने संबोधन में उन्होंने सूक्ष्मजीवों की मानव जीवन में भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सूक्ष्मजीव आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन जीवन की अनेक प्रक्रियाओं में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।

कुलपति ने अपनी कविता के माध्यम से सूक्ष्मजीवों की महत्ता को समझाते हुए कहा—
न दिखे जो आँखों को, वही जीवन का आधार है,
सूक्ष्म में ही छिपा हुआ, सृष्टि का सारा सार है।
जो दिखे न, वही तो सबसे बड़ा चमत्कार है,
उसी अदृश्य शक्ति से चलता यह संसार है।”

उन्होंने कहा कि सूक्ष्मजीव मानव के लिए मित्र भी हैं और चुनौती भी। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि लैक्टोबैसिलस जैसे सूक्ष्मजीवों का उपयोग दही बनाने में होता है, जबकि यीस्ट का इस्तेमाल ब्रेड और अन्य खाद्य पदार्थों के निर्माण में किया जाता है। इसी तरह पेनिसिलियम जैसे फंगस से पेनिसिलिन जैसे महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक की प्राप्ति हुई है।

कुलपति ने सूक्ष्मजीवों से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कोविड-19 का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि एक छोटा सा वायरस किस तरह व्यापक स्तर पर मानव जीवन और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है, कोविड-19 ने पूरी दुनिया को इसका अनुभव कराया।

पर्यावरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका
प्रो. (डॉ.) आर.सी. कुहाड़ ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में भी सूक्ष्मजीवों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ये कचरे को खाद में बदलने, पानी के शुद्धिकरण और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने जैसी प्रक्रियाओं में योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी और फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के विकास में माइक्रोबायोलॉजी का महत्वपूर्ण स्थान है।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि प्रयोगशालाओं में जाकर सूक्ष्मजीवों की दुनिया को समझें और शोध के माध्यम से ऐसे समाधान विकसित करें, जिनका समाज पर सकारात्मक और प्रत्यक्ष प्रभाव दिखाई दे।


कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय के चेयरमैन श्री संदीप चहल ने भी विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के शैक्षणिक कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, शोध के प्रति रुचि और विषय की व्यावहारिक समझ विकसित करने में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सूक्ष्मजीव विज्ञान से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझा और इसके मानव जीवन तथा पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की।