कुंदन कुमार/ पटना। ​पटना के राजनीतिक गलियारों में शनिवार की सुबह उस समय गहमागहमी बढ़ गई, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह के नीतीश कुमार से मिलने के लिए सीएम आवास पहुंचने की खबर सामने आई। हालांकि लंबे समय से अलग चल रहे इन दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं हो सकी जिसने बिहार की राजनीति में कयासों का नया दौर शुरू कर दिया है।

​मुलाकात का घटनाक्रम और अटकलें

​प्राप्त जानकारी के अनुसार आरसीपी सिंह आज सुबह नीतीश कुमार से मिलने के लिए उनके आवास पर पहुंचे थे। उनके पहुंचते ही यह चर्चा जोर पकड़ गई कि क्या आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी की तैयारी हो रही है? एक समय में नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाने वाले आरसीपी सिंह ने पार्टी संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। जदयू से राज्यसभा सांसद रहने और केंद्रीय मंत्री बनने तक का उनका सफर नीतीश कुमार की कृपा का ही परिणाम माना जाता था।

​मुलाकात क्यों नहीं हो सकी?

​राजनीतिक सरगर्मी तब और बढ़ गई जब मुलाकात न हो पाने की खबर आई। सूत्रों के अनुसार, आरसीपी सिंह को कुछ देर तक इंतजार कराया गया, लेकिन अंततः उनकी पूर्व मुख्यमंत्री से भेंट नहीं हुई। आरसीपी सिंह के समर्थकों ने इस घटनाक्रम के लिए जदयू के वरिष्ठ नेताओं, एमएलसी संजय गांधी और ललन सराफ पर आरोप लगाया है। समर्थकों का दावा है कि इन नेताओं ने साजिश के तहत आरसीपी सिंह की पू्र्व मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं होने दी।

​पुराने संबंधों का इतिहास

​आरसीपी सिंह कभी जदयू की धुरी हुआ करते थे। नीतीश कुमार के अत्यंत करीबी रहे आरसीपी सिंह ने ही पार्टी संगठन को जमीन पर खड़ा किया था। हालांकि बाद में नीतीश कुमार के साथ उनके संबंधों में खटास आ गई जिसके कारण उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी और बाद में वे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए।
​भले ही आज की मुलाकात संभव नहीं हो पाई लेकिन आरसीपी सिंह का नीतीश कुमार के आवास पहुंंचना अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। यदि भविष्य में ऐसी कोई मुलाकात होती है, तो यह बिहार के राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव का संकेत हो सकती है। फिलहाल, जदयू और बीजेपी दोनों खेमों में इस घटनाक्रम को लेकर चुप्पी है, लेकिन पटना के राजनीतिक विश्लेषक इसे आरसीपी सिंह की ‘घर वापसी’ की कोशिश या फिर किसी बड़ी राजनीतिक रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह के बीच की यह दूरी कम होती है या यह केवल एक संयोग मात्र था।