​पटना: बिहार की राजनीति के दिग्गज और वर्तमान राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने गुरुवार को पटना जिले के पालीगंज अनुमंडल स्थित दुल्हिनबाजार प्रखंड के ऐतिहासिक उलार गांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध ओलार्क (उलार) सूर्य मंदिर में भगवान भास्कर की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और मंदिर के कायाकल्प के लिए चल रहे विकास कार्यों की गहन समीक्षा की।

​राज्यसभा सांसद के रूप में पहला दौरा

​यह दौरा इसलिए भी खास रहा क्योंकि राज्यसभा सांसद बनने के बाद नीतीश कुमार का ऐतिहासिक उलार सूर्य मंदिर का यह पहला आगमन था। हालांकि मुख्यमंत्री रहने के दौरान भी वे निरंतर इस पवित्र स्थल पर आते रहे हैं और उनकी गहरी आस्था रही है। उनके आने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों की भारी भीड़ मंदिर परिसर के बाहर जुट गई। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित किया। इस दौरान मंदिर के महंत अवध बिहारी दास, पालीगंज के एसडीएम चंदन कुमार और डीएसपी राजीव चंद्र सिंह समेत जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे।

​15 करोड़ की योजनाओं से बदलेगी मंदिर की तस्वीर

​निरीक्षण के दौरान नीतीश कुमार ने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों का जायजा लिया। उल्लेखनीय है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ही इस मंदिर के सर्वांगीण विकास के लिए लगभग 15 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना स्वीकृत की गई थी। वर्तमान में इन योजनाओं पर कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। पर्यटन विभाग के माध्यम से इस मंदिर को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार ने इस मंदिर को एक विशिष्ट ‘कोरिडोर’ से जोड़ने का भी निर्णय लिया है, जिससे आने वाले समय में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

​पौराणिक महत्व और आस्था का केंद्र

​उलार सूर्य मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र राजा सांब द्वारा की गई थी। यह देश के उन चुनिंदा 12 प्रमुख सूर्य मंदिरों में से एक है, जिनका विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यहां की महिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चैती और कार्तिक छठ महापर्व के दौरान यहां देश-विदेश और विभिन्न राज्यों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर आते हैं।
​नीतीश कुमार का यह दौरा न केवल उनकी धार्मिक निष्ठा को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि बिहार सरकार राज्य की सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित और विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंदिर के सौंदर्यीकरण के बाद यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में और भी अधिक वृद्धि होने की संभावना है।