विकास कुमार, सहरसा। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 03/11 स्थित विवेकानंद पथ इन दिनों निर्माण कार्य में भारी अनियमितताओं को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया है। इस सड़क के निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर हो रहे इस कार्य से जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है, क्योंकि जनता के गाढ़े पसीने की कमाई और सरकारी राजकोष के धन का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है।

​आरटीआई एक्टिविस्ट ने खोली पोल

​इस पूरे मामले का खुलासा सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट प्रणव कुमार ने किया है। उन्होंने कोसी प्रमंडल के आयुक्त को एक लिखित आवेदन सौंपकर इस निर्माण कार्य की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग उठाई है। आवेदक का स्पष्ट कहना है कि सड़क निर्माण में तय किए गए तकनीकी मानकों को ताक पर रख दिया गया है, जिससे यह सड़क कुछ ही दिनों में उखड़ने की कगार पर पहुंच जाएगी।

​कम मोटाई और घटिया सामग्रियों का इस्तेमाल

​शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, सड़क की ढलाई निर्धारित मानक से काफी कम की जा रही है। मौके पर सड़क की ढलाई महज 2 से 2½ इंच ही की जा रही है, जबकि नियमों के मुताबिक इसकी मोटाई अधिक होनी चाहिए। इसके साथ ही, निर्माण कार्य में अत्यंत घटिया किस्म की ईंटों और निम्न स्तर के सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन सब खामियों के कारण सरकारी राशि के भारी दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।

अधिकारियों की चुप्पी और मनमानी दोबारा शुरू

हैरानी की बात यह है कि इस अनियमितता की शिकायत पहले भी फोटो और वीडियो सबूतों के साथ संबंधित अधिकारियों से की गई थी। सबूत मिलने के बाद अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए एक बार काम को रुकवा दिया था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद, बिना किसी सुधार के चुपचाप दोबारा सड़क की ढलाई का काम शुरू करवा दिया गया। निर्माण स्थल पर न तो कोई संबंधित अधिकारी या कनिष्ठ अभियंता (जेई) मौजूद रहता है और न ही योजना से जुड़ा कोई शिलापट्ट ही लगाया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा होता है।

​कार्रवाई और रोक की मांग

​प्रणव कुमार ने आयुक्त से पुरजोर मांग की है कि जब तक इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक निर्माण कार्य और इससे जुड़ी सरकारी राशि की निकासी पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके अलावा, इस धांधली में संलिप्त और दोषी पाए जाने वाले तमाम जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। इस महत्वपूर्ण आवेदन की एक-एक प्रतिलिपि नगर विकास विभाग और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को भी भेजी जा चुकी है, ताकि भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार किया जा सके।