रांची। परिसीमन और जनगणना को लेकर झारखंड में सियासी हलचल के बीच आदिवासी छात्र संघ ने बड़ा ऐलान किया है। संघ ने कहा है कि यदि जनगणना में सरना धर्मकोड का विकल्प नहीं दिया गया, तो जनगणना और परिसीमन दोनों का बहिष्कार किया जाएगा। संगठन ने इस मुद्दे को लेकर आंदोलन की भी घोषणा की है।

आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय संयोजक डॉ. सुशील कुमार मिंज ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि आदिवासी धर्म कोड को पहले हटाया गया और अब आदिवासी समुदाय की पहचान को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जनगणना में अलग धर्मकोड नहीं होने के कारण आदिवासी आबादी को दूसरे धर्मों के आंकड़ों में शामिल किया जाता है, जिससे उनकी वास्तविक जनसंख्या प्रभावित होती है।

‘सरना धर्मकोड नहीं तो जनगणना नहीं’

डॉ. मिंज ने कहा कि आदिवासी समुदाय लंबे समय से अलग सरना धर्मकोड की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि देश में विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग कोड उपलब्ध हैं, इसलिए प्रकृति पूजक आदिवासी समुदाय को भी अपनी अलग धार्मिक पहचान के लिए सरना धर्मकोड मिलना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि सरना धर्मकोड और परिसीमन का मुद्दा एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। संघ का कहना है कि आदिवासी आबादी के सही आंकड़े सामने नहीं आने का असर भविष्य में आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी पड़ सकता है।

18 सितंबर से महारैली की शुरुआत

आदिवासी छात्र संघ ने आंदोलन का कार्यक्रम भी घोषित किया है। संघ के अनुसार 18 सितंबर को गुमला से महारैली निकालकर सरना धर्मकोड लागू करने और परिसीमन के विरोध में अभियान शुरू किया जाएगा।

इससे पहले 13 और 14 सितंबर को रांची के मोरहाबादी मैदान में ऑल इंडिया ट्राइबल कल्चर कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही गई है। इसमें विभिन्न राज्यों से आदिवासी प्रतिनिधियों के शामिल होने का दावा किया गया है।

4 अक्टूबर को रांची में बड़ी रैली का ऐलान

संघ ने कहा कि देशभर के आदिवासी संगठनों के साथ चर्चा के बाद आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। संगठन ने भारत बंद और आर्थिक नाकेबंदी की तैयारी का भी दावा किया है। वहीं, आगामी 4 अक्टूबर को रांची के मोरहाबादी मैदान में महारैली के जरिए आंदोलन को और तेज करने की घोषणा की गई है।

आदिवासी छात्र संघ ने स्पष्ट किया है कि सरना धर्मकोड की मांग पूरी होने तक जनगणना और परिसीमन के मुद्दे पर उसका विरोध जारी रहेगा।