कलकत्ता हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल उपचुनाव के लिए टीएमसी के बागी गुट डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (TMC-D) को इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) का ‘लिफाफा’ सिंबल कहां तक उचित है. कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष और बिना भेदभाव के काम करना चाहिए.
कोर्ट ने आगे कहा कि जब इस पर आपत्ति जताई गई है तो फिर उसी चिह्न को क्यों शामिल किया जा रहा है? क्योंकि कुछ महीने पहले ही इसे दूसरी पार्टी ने इस्तेमाल किया था और आपके पास 183 चुनाव चिह्न मौजूद हैं. कोर्ट ने कहा कि आप निष्पक्ष होने के बजाय नियम-कायदे गिना रहे हैं.
क्या है पूरा मामला ?
इंडियन सेक्युलर फ्रंट ने बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से अपील की थी कि वह चुनाव आयोग को टीएमसी के बागी गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न देने से रोके. चुनाव आयोग ने हाल में नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाले ISF को ‘लिफाफा’ की जगह ‘अलमारी’ चिह्न दिया है. आईएसएफ ने 2024 का लोकसभा चुनाव और इस साल अप्रैल में पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव ‘लिफाफा’ चिह्न पर लड़ा था.
चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट पहुंची ISF ने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग ने किसी दूसरी पार्टी को यह चिह्न देते समय अपनी शक्तियों का सही और उचित इस्तेमाल किया था, जिस पर कोर्ट ने चुनाव आयोग से सवाल किया.
‘फैसला कब होगा, समय बताएं’, TMC मामले पर EC से सुप्रीम कोर्ट
वहीं दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा है कि वह मामले में अंतिम फैसला कब तक करेगा. बता दें कि, चुनाव आयोग द्वारा पार्टी के नाम और चिन्ह ‘जोड़ा फूल और घास’ को फ्रीज किए जाने के खिलाफ ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 28 सितंबर को होगी.
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठन पर नियंत्रण को लेकर विवाद है. एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, दूसरे का नेतृत्व पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं. ऋतब्रत गुट का कहना है कि पार्टी की पुराने संगठन का कार्यकाल खत्म हो चुका है. उसे जारी रखना अवैध है.
चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश
इस मामले में चुनाव आयोग का अंतिम फैसला आना बाकी है. फिलहाल आयोग ने 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों को देखते हुए एक अंतरिम आदेश जारी किया है. इसके तहत दोनों गुटों को पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया गया. अंतरिम व्यवस्था के तहत ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है और चुनाव चिन्ह के तौर पर ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ आवंटित किया गया है. दूसरी तरफ ऋतब्रत गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह दिया गया है.
कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव में दोनों पक्षों की तरफ से नामांकन भरा गया है. ऐसे में इस चुनाव के लिए एक अंतरिम व्यवस्था तय करना जरूरी था. चुनाव आयोग ने वही किया है. कोर्ट ने कहा कि अब इस मामले का जल्द निपटारा होना चाहिए. दोनों पक्षों को अपने सबूत पेश करने का उचित मौका मिले, लेकिन मामला अनिश्चित समय तक लंबित भी नहीं रह सकता.
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