सुरेंद्र जैन, धरसीवां। रायपुर जिले के धरसीवां विधानसभा के ग्राम जरौदा में प्रस्तावित मेसर्स नूतन इस्पात एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड के विस्तारीकरण को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। प्लांट के विस्तार को लेकर 9 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे से जरौदा में जनसुनवाई रखी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में पहले से मौजूद औद्योगिक इकाइयों के प्रदूषण से वे परेशान हैं और ऐसे में प्लांट की क्षमता बढ़ने से उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

प्रस्तावित विस्तार में स्पंज आयरन उत्पादन और फर्नेस क्षमता बढ़ाने के साथ पावर प्लांट और रोलिंग मिल का भी विस्तार किया जाना है। विस्तार की जानकारी सामने आने के बाद जरौदा के साथ रायखेड़ा, सिलतरा और कन्हरा क्षेत्र के ग्रामीण भी प्रदूषण, पानी, सड़क और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं सामने रख रहे हैं।
ग्रामीणों का दावा- पहले से प्रदूषण की मार झेल रहे गांव
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पहले से चल रहे उद्योगों के कारण राख, धुआं और भारी वाहनों से उड़ने वाली धूल की समस्या बनी हुई है। उनका दावा है कि कई जगह खेतों में काली राख की परत जमने से फसल उत्पादन पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी शिकायतों का भी ग्रामीणों ने जिक्र किया है।
ग्रामीणों के मुताबिक भूजल स्तर में भी गिरावट आई है और पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता बनी हुई है। उनका कहना है कि उद्योगों के विस्तार के साथ इन समस्याओं पर पहले से ज्यादा गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
कन्हरा का उदाहरण देकर जताई चिंता
ग्रामीणों ने उरला से लगे कन्हरा गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने के बाद वहां पानी को लेकर समस्या गंभीर हुई है। ग्रामीणों का दावा है कि कई जगह केमिकल युक्त पानी की समस्या के कारण लोगों को पेयजल के लिए दूसरे गांवों पर निर्भर होना पड़ता है और कन्हरा में कुम्हारी से पेयजल की आपूर्ति की जाती है।
इसी तरह भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि दिन-रात चलने वाले हैवी ट्रकों के कारण सड़कें जल्दी खराब होती हैं और वाहनों की आवाजाही से उड़ने वाली धूल से आसपास के गांव प्रभावित होते हैं।
“जरौदा को उरला-सिलतरा जैसा मत बनाओ”
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने उरला और सिलतरा क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने के बाद पैदा हुई समस्याओं को देखा है। उनका कहना है कि जरौदा में भी अगर उद्योगों की क्षमता कई गुना बढ़ती है तो प्रदूषण का असर गांव की आबादी और खेती पर पड़ सकता है।
एक ग्रामीण ने कहा, “हमने उरला और सिलतरा की हालत देखी है। वहां उद्योग बढ़े तो प्रदूषण इतना बढ़ गया कि गांव में रहना मुश्किल हो गया। अब वही असर जरौदा में भी दिखाई देने लगा है। अगर क्षमता 5 गुना बढ़ी तो हमारा गांव भी औद्योगिक प्रदूषण का गढ़ बन जाएगा।”
कुछ ग्रामीण महिलाओं ने भी प्रदूषण को लेकर अपनी चिंता जताई। उनका कहना है कि औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाला प्रदूषण घरों तक पहुंचता है और बच्चों को भी इसका असर झेलना पड़ता है। उन्होंने बच्चों के स्कूल आने-जाने में परेशानी की बात भी कही है।
जनसुनवाई में ग्रामीण रखेंगे ये मांगें
ग्रामीणों ने विस्तारीकरण से पहले कई मुद्दों पर स्पष्ट जानकारी और कार्रवाई की मांग की है। इनमें प्रमुख रूप से—
- वर्तमान प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था की जांच की जाए और यह देखा जाए कि ESP और बैग फिल्टर सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं।
- जनसुनवाई के दौरान पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट (EIA) को ग्रामीणों को हिंदी में समझाया जाए।
- रोजगार में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के साथ प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर की व्यवस्था की जाए।
- सड़क, पानी और राखड़ डंपिंग को लेकर ठोस योजना ग्रामीणों के सामने रखी जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि वे 9 अक्टूबर की जनसुनवाई में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी समस्याएं और मांगें रखेंगे। हालांकि, उनका कहना है कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो आगे आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है।
9 अक्टूबर की जनसुनवाई पर नजर

अब ग्रामीणों के साथ क्षेत्र के लोगों की नजर 9 अक्टूबर को होने वाली जनसुनवाई पर है। विस्तारीकरण के प्रस्ताव पर ग्रामीण अपनी आपत्तियां और मांगें प्रशासन के सामने रखेंगे। उनका मुख्य जोर इस बात पर है कि किसी भी विस्तार से पहले मौजूदा प्रदूषण की स्थिति, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और खेती पर पड़ रहे असर को गंभीरता से देखा जाए।
प्रबंधन से पक्ष लेने का प्रयास, जवाब नहीं मिला
विस्तारीकरण के साथ प्रदूषण नियंत्रण को लेकर फैक्ट्री प्रबंधन की क्या कार्ययोजना है, यह जानने के लिए प्रबंधन का पक्ष लेने का प्रयास किया गया। इसके लिए संपर्क किया गया, लेकिन प्रबंधन की ओर से कॉल रिसीव नहीं किया गया और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए भी कोई जवाब नहीं दिया गया।
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