Dharm Desk – कार्तिक मास की शुरुआत 27 अक्टूबर से हो चुकी है। हिंदू धर्म में इस महीने को भगवान विष्णु की आराधना, कार्तिक स्नान और दीपदान के लिए विशेष महत्त्वपूर्ण है। कार्तिक मास 24 नवंबर तक रहेगा। इस महीने में कई महत्वपूर्ण त्योहार आने वाले हैं लेकिन तीन प्रमुख धार्मिक पर्व खास है, जिनमें देवउठनी एकादशी, वैकुंठ चतुर्दशी और कार्तिक पूर्णिमा शामिल हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन अवसरों पर व्रत, पूजा-पाठ, स्नान, दान और दीपदान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

कार्तिक मास में स्नान और दीपदान का विशेष महत्व
कार्तिक मास में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने और भगवान विष्णु की पूजा करने का नियम है। श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और मंदिरों, तुलसी के पौधे तथा नदी के तट पर दीप जलाते हैं। मान्यता है कि इस महीने में श्रद्धापूर्वक किए गए धार्मिक कार्यों से मन की शुद्धि होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। इस माह को किए गए दीपदान से मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों में भी कार्तिक मास के दौरान दीपदान और दान-पुण्य का विशेष महतव दिया गया है। इस पूरे माह में नियमित दीपदान या पूजा-पाठ नहीं कर पाए तो इस माह के ये तीन महत्वपूर्ण व्रत करने से श्रीहरि का आशीर्वाद मिलता है।
- देवउठनी एकादशी
कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी या देवप्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। यह पर्व शुक्रवार, 20 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। इसके साथ ही चातुर्मास का समापन माना जाता है और विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप की पूजा करते हैं। व्रत रखते हैं और घरों में तुलसी तथा भगवान शालिग्राम की आराधना करते हैं। कई स्थानों पर तुलसी विवाह का आयोजन अगले दिन, 21 नवंबर को किया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि देवउठनी एकादशी पर व्रत और दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। - वैकुंठ चतुर्दशी
कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को वैकुंठ चतुर्दशी मनाई जाती है। यह पर्व सोमवार, 23 नवंबर को आने वाला है। इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्त्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन हरि और हर का मिलन हुआ था, इसलिए इसे हरिहर मिलन के रूप में भी जाना जाता है। श्रद्धालु इस अवसर पर भगवान विष्णु और शिवजी की आराधना करते हैं तथा स्नान, दान और दीपदान करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर पुण्य की प्राप्ति होती है। जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। - कार्तिक पूर्णिमा
कार्तिक मास का समापन मंगलवार, 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के साथ होगा। इस दिन को देव दीपावली भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि देवता इस दिन गंगा के तट पर दीप जलाकर उत्सव मनाते है। श्रद्धालु गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, जरूरतमंदों को दान देते हैं और शाम को दीपदान करते है। कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्त्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा, दान और दीपदान करने से सुख-समृद्धि आती है और परिवार में शांति बनी रहती है। इसलिए 20 नवंबर की देवउठनी एकादशी, 23 नवंबर की वैकुंठ चतुर्दशी और 24 नवंबर की कार्तिक पूर्णिमा कार्तिक मास के तीन प्रमुख धार्मिक अवसर पर व्रत जरूर करना चाहिए। इन पर्वों पर पूजा, व्रत और दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

