भुवनेश्वर। ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में राज्य ने एक अहम कदम उठाया है। आधिकारिक यात्रा पर दुबई पहुंचे ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ (ODOP) गैलरी का उद्घाटन किया। इस गैलरी के जरिए राज्य के अलग-अलग जिलों के खास हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रदर्शित किया जा रहा है।
दुबई में स्थापित इस विशेष ODOP गैलरी में ओडिशा के विभिन्न जिलों की पहचान बने पारंपरिक उत्पादों को जगह दी गई है। इसका मकसद स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराना और राज्य के उत्पादों को ‘लोकल से ग्लोबल’ पहचान दिलाना है।
इन जिलों के उत्पादों को मिली जगह
संबलपुर: विश्व प्रसिद्ध संबलपुरी साड़ियां गैलरी में आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं।
कटक: मणियाबंधा हथकरघा के साथ चांदी के बारीक तारों से तैयार की जाने वाली प्रसिद्ध सिल्वर फिलिग्री कला को प्रदर्शित किया गया है।
रायगड़ा: डोंगिरया कोंध समुदाय द्वारा हाथ से बुने जाने वाले विशेष डोंगिरया शॉल को शामिल किया गया है।
केन्दुझर: जिले की पारंपरिक टेराकोटा मूर्तियों और मिट्टी के बर्तनों को गैलरी में जगह मिली है।
बालेश्वर: काले ग्रेनाइट पत्थर यानी ब्लैक मगुनी से तैयार की गई नक्काशीदार मूर्तियां यहां प्रदर्शित की गई हैं।
पुरी: ओडिशा की प्रसिद्ध पारंपरिक पट्टचित्र कला और ताड़ के पत्तों पर की जाने वाली नक्काशी भी गैलरी का हिस्सा है।
‘लोकल से ग्लोबल’ बनाने का संकल्प
गैलरी के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि ओडिशा के पारंपरिक उत्पादों को ‘लोकल से ग्लोबल’ बनाना उनकी सरकार का संकल्प है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को नए बाजार और व्यापारिक अवसर मिलेंगे। इससे विशेष रूप से महिला उद्यमियों को भी अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गैलरी केवल ओडिशा की कला और संस्कृति को प्रदर्शित करने का माध्यम नहीं है। इसके जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर बढ़ाने, महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने और राज्य के उत्पादों के लिए निर्यात के नए रास्ते खोलने की कोशिश की जा रही है।
विदेशी खरीदारों और निवेशकों से सीधा जुड़ाव
दुबई जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र में ODOP गैलरी की स्थापना से ओडिशा के हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र को विदेशी खरीदारों और निवेशकों से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय उत्पादों के लिए नए बाजार विकसित होने की उम्मीद है।
यह पहल एक ओर जहां ओडिशा की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में मदद करेगी, वहीं दूसरी ओर कारीगरों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा सकती है। राज्य सरकार का फोकस स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के साथ-साथ आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और निर्यात को बढ़ावा देने पर है।
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