नई दिल्ली: ओडिशा सरकार ने 1999 के बहुचर्चित ऑस्ट्रेलियन मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो मासूम बेटों की नृशंस हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रवींद्र पाल उर्फ दारा सिंह की समय पूर्व रिहाई की याचिका को खारिज कर दी है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ओडिशा सरकार ने इस फैसले की जानकारी दी।

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने ओडिशा सरकार द्वारा प्रस्तुत 31 अगस्त के खारिज आदेश को रिकॉर्ड पर लिया। अदालत ने दारा सिंह के वकील को राज्य सरकार के इस निर्णय को चुनौती देने के लिए दो सप्ताह के भीतर उचित संशोधन आवेदन दाखिल करने की अनुमति दी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब तीन सप्ताह बाद होगी।

अदालत ने कहा, “आप जो भी आधार लेना चाहते हैं, लें। अपनी याचिका में संशोधन करें और फिर बहस करें।” ओडिशा सरकार के वकील ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि ‘राज्य सजा समीक्षा बोर्ड’ (State Sentence Review Board – SSRB) ने 31 अगस्त को एक विशेष बैठक में दारा सिंह की रिहाई याचिका को खारिज कर दिया था।

बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को ध्यान में रखते हुए इस स्तर पर उसकी रिहाई की सिफारिश नहीं की जा सकती। इससे पूर्व भी 2016, 2019, 2020, 2022 और 2023 में दारा सिंह की रिहाई की अर्जियों को इन्हीं आधारों पर खारिज किया जा चुका है।

63 वर्षीय दारा सिंह इस समय क्योंझर जिला जेल में बंद है और वह 25 वर्ष से अधिक की सजा काट चुका है। उसने 2024 में सुप्रीम कोर्ट का रुख कर समय पूर्व रिहाई की मांग की थी। याचिका में उसने दावा किया था कि वह 24 साल से अधिक की वास्तविक जेल काट चुका है और अपनी हरकत पर पछतावा व्यक्त करते हुए इसे “युवावस्था के गुस्से” का परिणाम बताया था।

22-23 जनवरी 1999 की मध्यरात्रि को क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में ऑस्ट्रेलिया के पादरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो मासूम बेटों – फिलिप (11 वर्ष) और टिमोथी (8 वर्ष) पर भीड़ ने हमला किया था। तीनों अपनी गाड़ी (स्टेशन वैगन) में सो रहे थे, जब गाड़ियों को आग लगा दी गई और वे जिंदा जल गए।

  • 2003: सीबीआई अदालत ने दारा सिंह को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया।
  • 2005: ओड़िशा हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।
  • 2011: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उम्रकैद के फैसले को बरकरार रखा।

गौरतलब है कि ग्राहम स्टेंस की पत्नी ग्लैडिस स्टेंस, जिन्हें 2005 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था, ने सार्वजनिक रूप से अपने पति और बेटों के हत्यारों को माफ करने की बात कही थी।

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