Dharm Desk – इस समय अधिकमास चल रहा है. जिसे सनातन धर्म में पूजा-पाठ, दान और उपासना के लिए बेहद पुण्यकारी माना जाता है, अधिकमास में किए गए जप-तप और सूर्य उपासना का फल कई गुना अधिक मिलता है. ऐसे में प्रतिदिन उगते सूर्य को जल चढ़ाने की परंपरा का महत्व और भी बढ़ जाता है. मान्यता है कि नियमित रूप से सूर्य को जल अर्पित करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मबल का संचार होता है. ज्योतिष और धर्मशास्त्रों में सूर्य को ऊर्जा, आत्मविश्वास, नेतृत्व और सम्मान का कारक कहा गया है. जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक सूर्यदेव को अर्घ्य देता है, उसके जीवन से नकारात्मकता दूर होती है. मानसिक शांति के साथ मान-सममान बढ़ता है.

अधिकमास के दौरान प्रतिदिन सूर्य को जल चढ़ाने से ग्रह दोष शांत होते है. परिवार में खुशहाली बनी रहती है. सूर्य को अर्घ्य देते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं. जल चढ़ाते समय मन शांत और सकारात्मक होना चाहिए. अर्घ्य का जल किसी के पैरों में नहीं गिरना चाहिए और बिना स्नान किए सूर्य को जल अर्पित नहीं करना चाहिए. माना जाता है, नियम और श्रद्धा के साथ की गई सूर्य उपासना व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा, स्वास्थ्य और सफलता लेकर आती है.

रविवार को सूर्य उपासना का महत्व

रविवार का दिन विशेष रूप से सूर्यदेव को समर्पित है. इस दिन सूर्य उपासना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. रविवार को सूर्य को जल चढ़ाने से करियर, नौकरी और व्यापार में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. साथ ही व्यक्ति के मान-सम्मान और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है. सूर्यदेव को जल चढ़ाने के लिए सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें. उसमें लाल कुमकुम और अक्षत यानी चावल डालें. इसके बाद उगते सूर्य की ओर मुख करके धीरे-धीरे जल अर्पित करें. जल चढ़ाते समय ओम सूर्याय नमः या ओम घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए. इससे सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं.