हेमंत शर्मा, इंदौर। जिस जगह का इस्तेमाल सार्वजनिक शौचालय के लिए होना था, वहां कथित तौर पर रातों-रात वृद्धाश्रम संचालित होने लगा। सरकारी जमीन पर चल रहे इस आश्रम में बुजुर्गों की सेवा नहीं, बल्कि उनके साथ कथित बर्बरता का वीडियो सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने पूरे शहर को झकझोर दिया। वीडियो में एक नाबालिग बुजुर्गों के साथ मारपीट करता दिखाई दे रहा है।
वृद्धाश्रम या अत्याचार का अड्डा?
मामला मारीमाता चौराहे के पास पानी की टंकी के नीचे संचालित ‘महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी’ के नाम से चल रहे वृद्धाश्रम का है। वायरल वीडियो में बुजुर्गों के साथ मारपीट के दृश्य सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई।बताया जा रहा है कि वीडियो वायरल होने के बाद आश्रम की संचालिका स्वयं नाबालिग को लेकर थाने पहुंची, लेकिन वहां भी कई सवालों के जवाब नहीं दे सकी।
दस्तावेज मांगते ही खुल गई परतें
जांच के दौरान पुलिस ने आश्रम के संचालन से जुड़े दस्तावेज मांगे, लेकिन संचालिका आवश्यक वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी। इसके बाद यह सवाल और गहरा गया कि आखिर बिना अनुमति यह आश्रम किसके संरक्षण में संचालित हो रहा था।
सरकारी जमीन पर कैसे चलने लगा आश्रम?
जांच में यह भी सामने आया कि जहां आश्रम संचालित किया जा रहा था, वह सरकारी जमीन है। आरोप है कि पहले यहां सार्वजनिक शौचालय था, जिसे बाद में वृद्धाश्रम का स्वरूप दे दिया गया।
संचालिका के मुताबिक, पूर्व एमआईसी सदस्य संतोष गौड़ ने संचालन के लिए यह स्थान नीलम दुबे को उपलब्ध कराया था। वहीं आश्रम परिसर में लगे बोर्ड पर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की पत्नी आशा विजयवर्गीय का नाम संरक्षक के रूप में दर्ज था। हालांकि, इस संबंध में उनकी भूमिका को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
31 बुजुर्गों को तत्काल कराया गया शिफ्ट
वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आश्रम में रह रहे 31 बुजुर्गों को सुरक्षित रूप से शासकीय निराश्रित वृद्धाश्रम में शिफ्ट कर दिया। इसके साथ ही विवादित आश्रम को सील कर दिया गया।
एफआईआर दर्ज, जांच जारी
मल्हारगंज एसडीएम निधि वर्मा की कार्रवाई के बाद संचालिका के खिलाफ बिना अनुमति वृद्धाश्रम संचालित करने सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पूरे मामले की जांच एसीपी रुबीना मिजवानी कर रही हैं। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि अवैध संचालन कब से चल रहा था, इसके पीछे कौन-कौन लोग थे और बुजुर्गों के साथ कथित मारपीट की घटनाएं पहले भी हुई थीं या नहीं।
सवाल सिर्फ एक आश्रम का नहीं, व्यवस्था का भी है
यह मामला सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि सरकारी जमीन पर कथित रूप से बिना वैध अनुमति वृद्धाश्रम कैसे संचालित होता रहा? जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? और सबसे बड़ा सवाल, जिन बुजुर्गों को सम्मान और सहारे की जरूरत थी, उनके साथ कथित मारपीट आखिर किसकी निगरानी में होती रही?अब सभी की नजर प्रशासन और पुलिस की जांच पर है कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई पहुंचती है या नहीं।
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