Lalluram Desk. पाकिस्तान के पूर्व कप्तान सलमान अकबर ने देश में हॉकी के मज़बूत घरेलू ढांचे की कमी को टीम के खराब प्रदर्शन के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि 2008 ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई न कर पाने के बाद भारत ने अपने ग्रासरूट और घरेलू इकोसिस्टम में निवेश किया और अब उसे इसका फ़ायदा मिल रहा है।
चार बार वर्ल्ड कप चैंपियन रह चुका पाकिस्तान ऐतिहासिक रूप से हॉकी की सबसे सफल टीमों में से एक है, आठ साल बाद पुरुष वर्ल्ड कप में लौटा है। टीम पिछले सीज़न में प्रो लीग में भी सबसे निचले पायदान पर रही थी।
230 इंटरनेशनल मैचों के साथ 2004 व 2008 ओलंपिक में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने वाले अकबर ने न्यूज एजेंसी से एक खास बातचीत में इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण नियमित घरेलू प्रतियोगिताओं की कमी को बताया।
नीदरलैंड में बस गए 44 वर्षीय अकबर ने कहा, “इसके कई कारण हैं, लेकिन सबसे बड़ा कारण यह है कि पाकिस्तान ने कभी भी अपने घरेलू हॉकी ढांचे को मज़बूत करने की कोशिश नहीं की। देश में खिलाड़ियों के लिए कोई मंच नहीं है।”
“खिलाड़ियों को इंटरनेशनल टूर्नामेंट में मौके मिलते हैं, इसलिए वे वहीं या घरेलू कैंप में व्यस्त रहते हैं। घरेलू ढांचा, जिससे प्रतिभाशाली खिलाड़ी तैयार होने चाहिए, वह है ही नहीं।”
2018 से जापान के साथ गोलकीपिंग कोच के तौर पर काम कर रहे अकबर ने कहा कि 2008 ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई न कर पाने के बाद भारत की वापसी किसी ‘क्विक फ़िक्स’ (तुरंत समाधान) का नतीजा नहीं, बल्कि लगातार निवेश का परिणाम थी।
इसके बाद भारत ने टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 में ओलंपिक ब्रॉन्ज़ मेडल जीते, 2023 एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता और कॉमनवेल्थ गेम्स व एशियाई चैंपियंस ट्रॉफ़ी में कई बार पोडियम फ़िनिश हासिल की।
उन्होंने कहा, “यह पीढ़ी खुशकिस्मत है कि वे ऐसे समय में आगे बढ़े जब भारतीय हॉकी 2008 बीजिंग ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई न कर पाने के सदमे से उबर रही थी।
“तब भारत ने अपने घरेलू ढांचे पर काम किया। आज उनके पास हॉकी इंडिया लीग है और साल भर चलने वाला व्यस्त शेड्यूल है।” उन्होंने कहा, “ये नतीजे एक-दो साल में नहीं, बल्कि टोक्यो ओलंपिक तक की मेहनत से मिले।”
पूर्व गोलकीपर ने कहा कि भारत ने अपने कोचिंग सिस्टम में भी निवेश किया और खिलाड़ियों का एक बड़ा पूल तैयार किया, जिससे उसे बड़े टूर्नामेंटों में लगातार मेडल जीतने वाली टीम के तौर पर उभरने में मदद मिली।
“उतार-चढ़ाव तो आए, लेकिन भारत ने अपने कोचों को भी ट्रेनिंग दी और टैलेंटेड खिलाड़ियों का पूल बनाया। अब वे हर बड़े टूर्नामेंट में मज़बूत मेडल दावेदार के तौर पर उतरते हैं।”
अकबर को उम्मीद है कि दोनों टीमों के अलग-अलग हाल के बावजूद भारत-पाकिस्तान की राइवलरी हमेशा की तरह ज़बरदस्त बनी रहेगी।
पाकिस्तान ने 2016 के बाद से भारत को नहीं हराया है, और अकबर का मानना है कि आने वाला मुकाबला उनकी पूर्व टीम को उस इंतज़ार को खत्म करने का मौका देता है। “हाल ही में भारत ने प्रो लीग में पाकिस्तान को आसानी से हराया, लेकिन मेरा मानना है कि पाकिस्तान उसका बदला लेने की कोशिश करेगा। लोगों को भारत-पाकिस्तान हॉकी मैच देखना पसंद है।
उन्होंने कहा, “यह मैच हॉकी के लिए बहुत अहम है। पाकिस्तान 2016 के बाद से भारत से नहीं जीता है, और यह एक सुनहरा मौका है। मैं दोनों टीमों को शुभकामनाएं देता हूं और उम्मीद करता हूं कि अच्छा हॉकी मैच देखने को मिलेगा और खिलाड़ी गर्मजोशी से हाथ मिलाएंगे।”
अकबर ने भारत के युवा गोलकीपर मोहित एचएस और सूरज करकेरा का भी समर्थन किया और कहा कि उन्हें दिग्गज गोलकीपर पीआर श्रीजेश के साथ काम करने के अनुभव से फ़ायदा होगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या श्रीजेश के रिटायरमेंट के बाद भारत को उनकी कमी खलेगी, तो अकबर ने कहा कि उनके पुराने अनुभव और प्रभाव से मौजूदा खिलाड़ियों को फ़ायदा मिलता रहेगा।
उन्होंने कहा, “मैं पक्के तौर पर तो नहीं कह सकता, लेकिन शानदार करियर के बाद उन्होंने सम्मान के साथ रिटायरमेंट लिया। अपने करियर के आखिरी दिनों में उनका प्रदर्शन ज़बरदस्त था। मौजूदा भारतीय गोलकीपरों ने प्रो लीग और बड़ी टीमों के खिलाफ़ खेला है, और उन्होंने श्रीजेश जैसे दिग्गज के साथ काम करके बहुत कुछ सीखा होगा।”
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