Asim Munir Pakistan New Provinces Plan: पाकिस्तान ’15 टुकड़ों’ में बंटेगा (Pakistan will be divided into 15 pieces)। जी हां…. पाक सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने देश का राजनीतिक नक्शा बदलने का पूरा प्लान तैयार किया। प्लान के मुताबिक पाकिस्तान में चार बड़े प्रांतों को बांटकर 12 से 15 नए प्रांत बनाने के प्रस्ताव। ये प्लान इन राज्यों में फैले असंतोष और बगावत को कुचलने के लिए तैयार किया गया है। हालांकि इससे पंजाब और सिंध जैसे बड़े प्रांतों की राजनीतिक ताकत कम होने की आशंका भी जताई जा रही है। आसिम मुनीर की इस प्लान का विरोध भी शुरू हो गया है।

सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम के प्लान के मुताबिक पाकिस्तान में 12 से 15 नए प्रांत बनाए जा सकते हैं। एक विकल्प में 160 छोटे प्रशासनिक क्षेत्र बनाने की भी बात है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।

इसके पीछे  सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर का तर्क है कि बड़े प्रांतों को प्रभावी तरीके से चलाना मुश्किल है। हालांकि, पाकिस्तान की आर्थिक समस्याओं की वजह सिर्फ प्रशासनिक ढांचा नहीं है। देश कमजोर आर्थिक विकास, महंगाई और भारी कर्ज के बोझ से भी जूझ रहा है। पाकिस्तान में सेना लंबे समय से राजनीति में अहम भूमिका निभाती रही है। देश के इतिहास के दो-पांचवें से ज्यादा समय तक सेना सीधे सत्ता में रही है। निर्वाचित सरकारें भी कई बार उसके प्रभाव में काम करती रही हैं। मीडिया रिपोर्ट में सेना की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सेना के पास बड़ी जमीन और कारोबार हैं। सरकारी संसाधनों में भी उसकी अहम हिस्सेदारी है।

फिलहाल पाकिस्तान में चार प्रांत

बता दें कि फिलहाल पाकिस्तान में चार प्रांत हैं। इनमें पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान शामिल हैं। इनके बंटवारे से प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है। इससे देश में राजनीतिक ताकत का संतुलन भी बदल सकता है। पाकिस्तान के चारों प्रांत आबादी और क्षेत्रफल के लिहाज से काफी अलग हैं। पंजाब देश का सबसे ज्यादा आबादी वाला प्रांत है। यहां करीब 12.8 करोड़ लोग रहते हैं। यह पाकिस्तान की आधी से ज्यादा आबादी है। वहीं दूसरी ओर, बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा प्रांत है। हालांकि यहां करीब डेढ़ करोड़ लोग रहते हैं।

बलूचिस्तान और पाक के कब्जे वाले कश्मीर में चुनौतियां

बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववादी हिंसा होती रही है। यहां संसाधनों और इस्लामाबाद की भूमिका को लेकर भी विवाद हैं। ऐसे में प्रांत को बांटने का फैसला जमीन, संसाधनों और स्थानीय राजनीतिक अधिकारों से जुड़े संवेदनशील सवाल खड़े कर सकता है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भी शासन, महंगाई, टैक्स और आर्थिक हालात को लेकर असंतोष सामने आता रहा है। इन हालात के बीच देश की आंतरिक सीमाओं को बदलना आसान नहीं होगा।

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