कुंदन कुमार, पटना। बिहार की राजनीति में अपनी बेबाक बयानी के लिए जाने जाने वाले पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने पटना में एक प्रेसवार्ता के दौरान केंद्र सरकार और देश की मौजूदा व्यवस्था पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने युवाओं के अपमान से लेकर देश की अर्थव्यवस्था, चुनावी धांधली और दिल्ली के राजनीतिक हालातों तक कुल 6 बड़े मुद्दों पर तीखे सवाल उठाए।
युवाओं के अपमान पर तीखी प्रतिक्रिया
सांसद पप्पू यादव ने सत्ता पक्ष और न्यायपालिका के बयानों पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी द्वारा युवाओं को ‘तेलचट्टा’ कहे जाने और मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि देश का युवा न तो कॉकरोच है और न ही हमारी बेटियां-बहनें मक्खी या झींगुर हैं। उन्होंने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा कि यदि इस देश में कोई असल मायने में मक्खी, झींगुर या कॉकरोच है, तो वे देश के नेता हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता को लूटने और देश की आत्मा से गद्दारी करने में नेता सबसे आगे हैं।
वोट चोरी और न्याय व्यवस्था पर चिंता
चुनावों में धांधली का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि आज संविधान की रक्षा की एकमात्र उम्मीद सुप्रीम कोर्ट बचा है, लेकिन व्यवस्था से थक चुके होने के कारण अब न्यायालय से भी डर लगने लगा है। राहुल गांधी के बिहार दौरे का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में करीब 67 लाख वोट काटकर चुनाव जीते गए हैं, और खुद एक जज ने स्वीकार किया है कि बंगाल में गलत तरीके से मतदाताओं के नाम जोड़े और काटे गए थे।
चरमराती अर्थव्यवस्था और बढ़ता कर्ज
देश की आर्थिक बदहाली पर बात करते हुए उन्होंने आंकड़े सामने रखे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम 57 से 62 रुपये के बीच हुआ करते थे, जो आज बढ़कर 110 से 120 रुपये तक पहुंच चुके हैं। 2014 में देश पर 52-53 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब बढ़कर 86-89 बिलियन डॉलर हो गया है। पिछले कुछ दिनों में भारी मात्रा में पूंजी देश से बाहर भेजी गई है, मध्यम वर्ग ईएमआई के बोझ तले दब चुका है, देश में एक लाख से अधिक स्कूल-कॉलेज बंद हो चुके हैं, पेपर लीक आम हो गए हैं और बेरोजगारी तीन गुना बढ़ गई है।
उद्योगपतियों का प्रभाव और दिल्ली के हालात
एलन मस्क के एक कथित ट्वीट का हवाला देते हुए पप्पू यादव ने कहा कि उस पर प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और भाजपा-आरएसएस का कोई भी प्रवक्ता नहीं बोला, जिससे यह प्रतीत होता है कि देश के असली नीति-निर्माता प्रधानमंत्री नहीं बल्कि दो बड़े उद्योगपति हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश के अधिकांश पैरामिलिट्री फोर्स को जम्मू-कश्मीर से हटाकर आम जनता पर लगा दिया गया है, जिससे दिल्ली में भय का माहौल बना हुआ है।
दिल्ली आंदोलन और दमन की सियासत
अंत में दिल्ली में चल रहे आंदोलनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश में 1942 के बाद से सबसे बड़ा जन-आंदोलन शुरू हो चुका है। राहुल गांधी कन्याकुमारी से कश्मीर तक हजारों किलोमीटर पैदल चलकर देश की आत्मा को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। हाल ही में दिल्ली में हजारों लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं, इंटरनेट और ट्रेन सेवाएं बाधित की गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व के अन्ना आंदोलन में जहां सरकार ने स्वागत किया था, वहीं आज विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।

