पटना। बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की सुरक्षा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। जस्टिस मनोज जैन की अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि सांसद की सुरक्षा बढ़ाई जाए। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि एक सांसद की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है और यह नहीं कहा जा सकता कि उन पर हुआ हमला मनगढ़ंत है।
​केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील आशीष दीक्षित ने अदालत को बताया कि सुरक्षा बढ़ाने को लेकर दिए गए प्रतिवेदन पर सरकार अभी विचार कर रही है। वहीं, सांसद के वकील शादान फरासत ने दलील दी कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में संसद के बाहर एक नाटक करने के बाद से ही उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।

​क्या है पूरा मामला और धमकियों का कारण?

​पप्पू यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि उनकी सुरक्षा का नए सिरे से आकलन किया जाए और पूरे देश में उनकी सुरक्षा बढ़ाई जाए। याचिका में कहा गया कि धमकियां मिलने के बाद उन्होंने गृह मंत्रालय को लिखित आवेदन भेजा था, लेकिन उस पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया, जो कि संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। वर्तमान में पप्पू यादव को केवल बिहार राज्य के भीतर वाई-प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

​दिल्ली आवास पर हुआ था हमला

​गौरतलब है कि गत 2 अगस्त को दिल्ली स्थित पप्पू यादव के आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन पर हमला किया गया था। उस समय एक युवक ने उनके ऊपर चप्पल फेंक दी थी। इसके बाद आक्रोशित समर्थकों ने आरोपी की जमकर पिटाई कर दी थी। पुलिस द्वारा ले जाते वक्त भी समर्थकों ने आरोपी को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था। पकड़े गए हमलावर की पहचान बुलंदशहर के भाजपा नगर मंत्री सुमित प्रधान उर्फ सुमित गिरि गोस्वामी के रूप में हुई थी। इस घटना के बाद से सांसद की सुरक्षा को लेकर चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।