कुंदन कुमार, पटना। शहर के गर्दनीबाग में मीडिया से मुखातिब होते हुए सांसद पप्पू यादव ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और शिक्षा के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार चल रहा है।
कॉपियों की गलत चेकिंग और लेट सेशन का गंभीर आरोप
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि जानबूझकर बच्चों की कॉपियों को गलत तरीके से चेक करके उन्हें फेल किया जा रहा है। एक साल में दो-दो बार परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं, जिससे छात्रों का मानसिक उत्पीड़न हो रहा है। उन्होंने बताया कि कागजों पर भले ही यह दावा किया जाए कि सत्र नियमित चल रहा है, लेकिन हकीकत में कई छात्रों का सेशन तीन-तीन साल तक पिछड़ रहा है, जिससे उनका अमूल्य समय बर्बाद हो रहा है।
मनमाने नियम और पीजी परीक्षा में लापरवाही
विश्वविद्यालयों की व्यवस्था को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि छात्र लंबे समय तक पढ़ाई करते हैं और प्रशासन अचानक परीक्षा की तारीख घोषित कर देता है। पीजी परीक्षा का उदाहरण देते हुए उन्होंने खुलासा किया कि प्रश्नपत्र में सिलेबस से बाहर के सवाल पूछ दिए गए। जब छात्रों ने इसका विरोध किया और हंगामा मचाया, तब जाकर परीक्षा को करीब तीन घंटे के लिए रोका गया और नया प्रश्नपत्र छपवाकर छात्रों को थमाया गया। यह विश्वविद्यालय प्रशासन की घोर लापरवाही को दर्शाता है।
पास कराने के नाम पर भारी वसूली का सनसनीखेज दावा
सांसद ने सबसे बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि पास कराने के एवज में छात्रों से अवैध वसूली की जा रही है। ऐसी शिकायतें मिली हैं कि सामान्य छात्रों से पास कराने के नाम पर 60 हजार रुपये तक मांगे जा रहे हैं। वहीं, प्राइवेट छात्रों से कथित तौर पर तीन लाख रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है। उन्होंने वीसी और रजिस्ट्रार की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि यह शिक्षा के नाम पर चल रहा एक बहुत बड़ा घोटाला है, जहां मासूम छात्रों को ठगा जा रहा है।
सरकार और प्रशासन से सुधार की पुरजोर मांग
पप्पू यादव ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में चल रही इस कथित लूट और अनियमितताओं को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की कि वे छात्रों की इन समस्याओं को पूरी गंभीरता से लें। अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इन बच्चों को अपना संतान मानकर इनकी समस्याओं का तुरंत समाधान करना चाहिए, ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके।



