दिल्ली के चांदनी चौक स्थित करीब 160 साल पुराने ऐतिहासिक टाउन हॉल का एक हिस्सा ढह गया। इस घटना के बाद इलाके में चिंता का माहौल है। टाउन हॉल के आसपास हर दिन बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे व्यस्त इलाके में ऐतिहासिक इमारत का हिस्सा गिरना सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। चांदनी चौक की पहचान माने जाने वाले इस ऐतिहासिक टाउन हॉल की मौजूदा स्थिति जर्जर बताई जा रही है। इमारत की खराब हालत को देखते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) प्रशासन ने परिसर को पूरी तरह बंद कर दिया है। यहां आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।
कायाकल्प की तैयारी, लेकिन ASI से नहीं मिली अनुमति
ऐतिहासिक टाउन हॉल के कायाकल्प की प्रक्रिया को लेकर एमसीडी प्रशासन ने इस साल से तैयारियां शुरू कर दी थीं। इमारत को संरक्षित करने और उसके पुनर्विकास के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम करने की योजना बनाई गई है। हालांकि, इन परियोजनाओं को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से अभी तक एमसीडी को आवश्यक अनुमति नहीं मिली है। इसके चलते टाउन हॉल के कायाकल्प की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है।
संरक्षण के लिए दो साल पहले ASI को लिखा था पत्र
महापौर प्रवेश वाही ने बताया कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ऐतिहासिक टाउन हॉल के संरक्षण और इसकी विरासत को संजोने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इस संबंध में निगम प्रशासन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को दो साल पहले पत्र लिखा था। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर एएसआई के अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत की जा रही है, लेकिन अभी तक एमसीडी को इमारत के संरक्षण और कायाकल्प के लिए आवश्यक अनुमति नहीं मिली है। महापौर के मुताबिक, टाउन हॉल की जर्जर स्थिति को देखते हुए आम लोगों के प्रवेश पर पहले से ही रोक है। हाल ही में इमारत का एक हिस्सा ढहने के बाद परिसर के आसपास सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेडिंग कर दी गई है।
ऐतिहासिक टाउन हॉल में हुई थीं एमसीडी की पहली बैठकें
चांदनी चौक स्थित यह टाउन हॉल दिल्ली की ऐतिहासिक और प्रशासनिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। निगम अधिकारियों के अनुसार, यहां दिल्ली नगर निगम की पहली बैठक 1 जून 1863 को हुई थी। इसके बाद 1957-58 में औपचारिक रूप से एमसीडी की स्थापना होने के बाद से वर्ष 2009 के अंत तक यह निगम का मुख्यालय रहा। इस दौरान यहां सदन की बैठकों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठकें और अन्य सरकारी कार्य भी संपन्न हुए। वर्ष 2009 के अंत में एमसीडी का मुख्यालय चांदनी चौक के ऐतिहासिक टाउन हॉल से मिंटो रोड स्थित नए सिविक सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद टाउन हॉल का प्रशासनिक उपयोग बंद हो गया।
क्यों है टाउन हॉल दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहर?
दिल्ली के चांदनी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल का महत्व केवल एक पुरानी इमारत होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की प्रशासनिक और राजनीतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। एमसीडी की निर्माण समिति के पूर्व अध्यक्ष जगदीश ममगांई ने बताया कि दिल्ली नगर निगम के स्वामित्व वाला करीब 160 वर्ष पुराना यह भवन वर्ष 1861 से 1866 के बीच ‘दिल्ली इंस्टीट्यूट’ के रूप में बनाया गया था। वर्ष 1866 में इसे नगर निगम मुख्यालय में परिवर्तित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1935 से 1939 के दौरान इस भवन का विस्तार किया गया और इसे दो मंजिला स्वरूप दिया गया। इसके निर्माण में पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी विंग शामिल हैं। वर्ष 2012 तक यह भवन निगम मुख्यालय के रूप में इस्तेमाल होता रहा, लेकिन इसके बाद से परिसर काफी हद तक खाली और अनुपयोगी पड़ा है।
टाउन हॉल का है राष्ट्रीय महत्व, कई पूर्व प्रधानमंत्री कर चुके हैं दौरा
जगदीश ममगांई के अनुसार, ऐतिहासिक टाउन हॉल का राष्ट्रीय महत्व भी रहा है। वर्ष 1957 में जब पहली बार दिल्ली नगर निगम का गठन हुआ, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इसके उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे।इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी सहित कई प्रमुख नेता भी विभिन्न औपचारिक बैठकों में यहां पहुंचे। इस तरह टाउन हॉल देश के कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रमों का साक्षी रहा है।
विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और राजनयिकों का भी हुआ स्वागत
टाउन हॉल का परिसर अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के स्वागत का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। जगदीश ममगांई ने बताया कि हैदराबाद हाउस में ऐसी व्यवस्थाएं शुरू होने से पहले विदेशी मेहमानों के सार्वजनिक नागरिक अभिनंदन टाउन हॉल परिसर के पार्क में आयोजित किए जाते थे। इस दौरान अमेरिका, रूस और ब्रिटेन सहित कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राजनयिक यहां पहुंचे थे। इस लिहाज से टाउन हॉल केवल दिल्ली की नगर निगम व्यवस्था का पुराना मुख्यालय नहीं, बल्कि भारत के राजनीतिक, प्रशासनिक और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर भी है।
2011 में लाए गए थे तीन प्रस्ताव, अब तक नहीं हुआ कोई काम
एमसीडी की निर्माण समिति के पूर्व अध्यक्ष जगदीश ममगांई ने बताया कि वर्ष 2011 में जब निगम का मुख्यालय टाउन हॉल से सिविक सेंटर स्थानांतरित हुआ, तब इस ऐतिहासिक इमारत के इस्तेमाल को लेकर तीन प्रस्ताव सामने आए थे। वर्ष 2011-12 में टाउन हॉल को हेरिटेज होटल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके अलावा परिसर में उपलब्ध पर्याप्त जमीन को देखते हुए एक हिस्से में मेडिकल कॉलेज और दूसरे हिस्से में अस्पताल बनाने की योजना भी प्रस्तावित की गई थी। हालांकि, इन प्रस्तावों पर कोई ठोस काम नहीं हो सका। ममगांई ने चिंता जताते हुए कहा कि इतनी गौरवशाली ऐतिहासिक संपत्ति की देखरेख और संरक्षण को लेकर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
निगम ने तैयार की संरक्षण और पुनर्विकास की योजना
दूसरी ओर, दिल्ली के चांदनी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल के संरक्षण और पुनर्विकास को लेकर एमसीडी ने इस साल अप्रैल में परियोजना को मंजूरी दी थी। योजना के तहत करीब 160 वर्ष पुराने इस भवन को आधुनिक और समावेशी संग्रहालय के साथ व्याख्या केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इस परियोजना पर दिल्ली नगर निगम और दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC) मिलकर काम करेंगे। इसके लिए दोनों संस्थाओं के बीच समझौता भी हो चुका है। परियोजना पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य टाउन हॉल की ऐतिहासिक पहचान और वास्तुकला को सुरक्षित रखते हुए इसे एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है। संग्रहालय और व्याख्या केंद्र बनने से दिल्ली के इतिहास, नगर निगम की विरासत और इस इमारत से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं को आम लोगों के सामने प्रस्तुत किया जा सकेगा।
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