अमेरिका के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। एक बड़े ही अजीब और रहस्यमयी घटनाक्रम में ऑस्ट्रेलिया से निकले अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान के पुर्जे हांगकांग पहुंच गए हैं। अब दावा किया जा रहा है कि इन पुर्जों को चीन ने अपने कब्जे में ले लिया है, क्योंकि हांगकांग चीन का एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है। इस घटना ने ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका तक हलचल मचा दी है। आशंका है कि चीन इन पुर्जों से अमेरिकी विमानों की तकनीक हासिल कर सकता है।

Lockheed Martin F-35 Lightning II - Wikipedia

मई में ऑस्ट्रेलिया से रवाना हुए थे पुर्जे

दरअसल, ऑस्ट्रेलियाई वायुसेना के पास 72 F-35A लाइटनिंग II स्टील्थ लड़ाकू विमान हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, मई में ये पुर्जे मरम्मत के लिए अमेरिका भेजे गए थे। दिग्गज शिपिंग कंपनी UPS ये काम संभाल रही थी। हालांकि, तय रास्ते से उलट पुर्जों की खेप पहले दक्षिण कोरिया में रुक गई फिर वहां से इन्हें रहस्यमय तरीके से हांगकांग भेज दिया गया। शिपिंग कंपनी के अधिकारियों ने अभी तक शिपमेंट के रास्ता बदलने की वजह नहीं बताई है।

पुर्जों में क्या-क्या शामिल है?

रिपोर्ट के मुताबिक, शिपमेंट में F-35 विमान की कॉकपिट कैनोपी और हथियार रखने वाले हिस्से का दरवाजा शामिल है। अमेरिका के लिए चिंता की बात ये है कि इन पुर्जों पर रडार से बचने के लिए खास सामग्री की परत चढ़ी हुई है। इस वजह से विमान की स्टेल्थ क्षमताएं बढ़ जाती हैं। ये परत रेडियो तरंगों को सोख लेती हैं और उन्हें वापस भेजने के बजाय गर्मी में बदल देती हैं। इससे विमान रडार के पकड़ में नहीं आता।

अमेरिका ऑस्ट्रेलिया दोनों ने शुरू की जांच

पेंटागन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। F-35 संयुक्त कार्यक्रम कार्यालय ने एक बयान में कहा कि वह F-35 विमान के शिपमेंट से जुड़ी समस्या से अवगत है। बयान के मुताबिक, “हम पुर्जों को प्राप्त करने, घटना की जांच करने और भविष्य में ऐसा न हो इसके लिए अधिकारियों और उद्योग भागीदारों के साथ काम कर रहे हैं।” वहीं, ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने कहा कि वे अमेरिका और लॉकहीड मार्टिन के संपर्क में हैं।

रिपोर्ट में दावा- चीन के पास हैं पुर्जे

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये पुर्जे अब चीन के पास हैं। हालांकि, चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसे घटना की जानकारी नहीं है। वहीं, हांगकांग ने सरकार संबंधी विशिष्ट मामलों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री ने कहा कि पुर्जों में कोई भी संवेदनशील सामग्री नहीं थी, लेकिन ज्यादातर विश्लेषक इसे बड़ी सुरक्षा चूक मान रहे हैं।

5वीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है F-35

F-35 5वीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जिसे अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने बनाया है। एक F-35 की कीमत करीब 900 करोड़ रुपये है। अमेरिका समेत कई नाटों देश इसे इस्तेमाल करते हैं। यह सिंगल इंजन विमान है, जो लगभग 1,900 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। यह छोटे रनवे से टेकऑफ और वर्टिकल लैंडिंग के लिए जाना जाता है और एक साथ सैकड़ों लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है।

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