कुंदन कुमार, पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के दो प्रमुख घटकों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज करने वाले राहुल राज को बीजेपी में शामिल कराए जाने के बाद जेडीयू ने सख्त रुख अपनाया है। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने बीजेपी के इस कदम पर खुले तौर पर अपनी असहमति और नाराजगी जताई है।

​छह साल के निष्कासन पर जेडीयू का तीखा हमला

​जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने बीजेपी के इस फैसले पर कड़ा एतराज व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी के इस कदम से गठबंधन के भीतर गलत संदेश जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस नेता को बीजेपी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखाया था, उसे चुनाव जीतते ही वापस पार्टी में किस परिस्थिति और दबाव के तहत शामिल किया गया? उन्होंने कहा कि राजनीतिक शुचिता और पार्टी के अनुशासन को ध्यान में रखते हुए बीजेपी और उसके शीर्ष नेतृत्व को इस फैसले पर गहराई से विचार करना चाहिए।

​एनडीए गठबंधन के भीतर खींचतान की आशंका

​राहुल राज की इस अचानक वापसी ने बिहार एनडीए के भीतर तालमेल और आपसी सहमति के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि चुनाव के समय बागी नेताओं पर कार्रवाई का दिखावा करने के बाद, सत्ता का समीकरण साधने के लिए उन्हें तुरंत अपना लेना किसी भी सूरत में उचित नहीं है। जेडीयू के इस कड़े रुख के बाद बीजेपी पर अपने फैसले का औचित्य साबित करने का भारी नैतिक दबाव बन गया है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर जेडीयू की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाता है और गठबंधन के इस तनाव को कैसे शांत करता है।