पटना। ​बिहार की राजधानी पटना में साइबर अपराध और सुरक्षा इकाई ने एक अत्यंत संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो डिजिटल धोखाधड़ी के माध्यम से देश भर में जाल बिछाए हुए था। पटना साइबर थाना पुलिस की मदद से की गई इस कार्रवाई में गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।

​गिरोह के सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी

​पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें कंकड़बाग निवासी गौतम गंभीर, रामकृष्णा नगर के तनय सिंह, हिलसा (नालंदा) के सुमित राज और कंकड़बाग के रामलखन पथ निवासी विवान सिंह शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में पुलिस की विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।

​म्यूल खातों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का खेल

​जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह मुख्य रूप से म्यूल बैंक खातों का उपयोग करता था। आरोपी आम लोगों के नाम पर फर्जी या प्रलोभन देकर बैंक खाते खुलवाते थे। साइबर ठगी से प्राप्त अवैध धनराशि को सबसे पहले इन्हीं खातों में मंगाया जाता था। इसके बाद, इस राशि को क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर विदेशी आकाओं विशेषकर चीन में बैठे साइबर अपराधियों तक पहुंचाया जाता था। पुलिस को आशंका है कि यह एक विशाल मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का हिस्सा है।
​बड़ी बरामदगी और साक्ष्य
​छापेमारी के दौरान पुलिस ने अपराध से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • ​4 मोबाइल फोन और 8 सिम कार्ड।
  • ​13 एटीएम कार्ड और 10 चेकबुक।
  • ​6 बैंक पासबुक और 6 सरकारी/निजी संस्थाओं की मोहरें।
  • ​1 क्यूआर पेमेंट कोड।

इन उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि नेटवर्क के पूरे विस्तार को समझा जा सके।

​14.67 करोड़ का लेन-देन और बैंक अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका

​जब्त किए गए बैंक खातों की पड़ताल से पता चला है कि इन खातों के माध्यम से देश भर में दर्ज साइबर ठगी के करीब 14 करोड़ 67 लाख रुपये का लेन-देन हुआ है। इस मामले में एक चौंकाने वाला पहलू यह भी सामने आया है कि आरोपी कुछ बैंक कर्मियों के साथ मिलीभगत कर कॉरपोरेट बैंक खाते खुलवाते थे। पुलिस अब बैंक अधिकारियों की संलिप्तता की गहन जांच कर रही है ताकि इस संगठित अपराध की जड़ों को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।