पटना‌। बिहार की राजनीति में विधान परिषद की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव ने सरगर्मी बढ़ा दी है। इन सीटों पर सभी प्रत्याशियों की निर्विरोध जीत पहले ही सुनिश्चित हो चुकी है, क्योंकि कुल 10 सीटों के लिए केवल 10 उम्मीदवारों ने ही नामांकन भरा था। इस सियासी घटनाक्रम के बीच भोजपुरी सुपरस्टार और भाजपा के विधान परिषद (MLC) उम्मीदवार पवन सिंह का ‘बाहुबली’ अनंत सिंह से मिलना चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

​मुलाकात और सियासी समीकरण

​भाजपा ने पवन सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। उम्मीदवार घोषित होने के बाद पवन सिंह ने पटना स्थित अनंत सिंह के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। इस मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पवन सिंह का चुनाव के ठीक पहले अनंत सिंह से मिलना भविष्य की बड़ी रणनीतियों का हिस्सा हो सकता है। मुलाकात के बाद अनंत सिंह उन्हें विदा करने घर के बाहर तक आए, जिसने सियासी गलियारों में कई कयासों को जन्म दिया है।

​औपचारिक प्रक्रिया और जीत का प्रमाण पत्र

​विधान परिषद की इन 10 सीटों पर भाजपा के 4, जदयू के 4, लोजपा (रामविलास) के 1 और राजद के 1 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। निर्वाचन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सभी प्रत्याशियों को विधानसभा परिसर में जीत का प्रमाण पत्र सौंपा जाएगा। इसके बाद ये सभी नेता विधान पार्षद के रूप में अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे।

​मुख्यमंत्री से मुलाकात

​जीत का प्रमाण पत्र मिलने के बाद भाजपा के सभी नवनिर्वाचित उम्मीदवार, वरिष्ठ नेता संजय मयूख के नेतृत्व में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से मुलाकात करेंगे। वहीं, दूसरी ओर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के चारों नवनिर्वाचित एमएलसी नीतीश कुमार से उनके 7, सर्कुलर रोड स्थित आवास पर मिलेंगे।
​यह मुलाकात महज औपचारिक नहीं है। इसे आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नवनिर्वाचित सदस्य अपने नेतृत्व से आशीर्वाद लेने के साथ-साथ आगे की जिम्मेदारियों और क्षेत्र में पार्टी की पकड़ मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। पवन सिंह का चुनावी मैदान में उतरना और फिर दिग्गज नेताओं के साथ यह मेल-जोल आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की एक सोची-समझी कवायद के रूप में देखा जा रहा है।