कुरुक्षेत्र। हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में पिहोवा की सिकंदरा कॉलोनी निवासी 34 वर्षीय विक्की अरोड़ा 12 साल बाद पहली बार अमेरिका से घर लौटने वाले थे, लेकिन रविवार को उनका शव ताबूत में बंद होकर घर पहुंचा। दिवाली के आसपास बेटे के आने और उसकी शादी कराने की तैयारियों में जुटा परिवार शव देखते ही बिलख पड़ा। जिस घर में रिश्ते की बातचीत और शादी की प्लानिंग चल रही थी, वहां 15 दिन के इंतजार के बाद अब मातम पसरा हुआ है।
12 साल बाद पहली बार घर आने की थी तैयारी
विक्की अरोड़ा करीब 12 साल पहले रोजगार के सिलसिले में अमेरिका गए थे। इतने लंबे समय तक घर से दूर रहने के बाद उन्होंने इस साल नवंबर में दिवाली के आसपास पहली बार अपने वतन लौटने का फैसला किया था। 12 साल बाद बेटे के घर आने की खबर ने पूरे परिवार में जश्न का माहौल बना दिया था और पिता कश्मीरी लाल अपने बेटे का स्वागत करने की तैयारियों में जुट गए थे।
बेटे को दूल्हा बनाने का सपना देख रहे थे पिता
विक्की के आने की खबर के साथ ही परिवार ने उनकी शादी की योजना बनानी शुरू कर दी थी। पिता कश्मीरी लाल अपने बेटे के सिर पर सेहरा बांधने का सपना संजोए हुए थे। पूरा परिवार सिकंदरा कॉलोनी में एक ही जगह रहता है, इसलिए रोजाना काम से लौटने के बाद शादी के रिश्ते और मैरिज अरेंजमेंट पर चर्चा होती थी। परिजन कई बार अपनी दुकानों से जल्दी घर लौट आते थे ताकि शादी की प्लानिंग आगे बढ़ा सकें।
दिवाली पर होनी थी रिश्ता पक्का करने की बात
परिजनों का प्लान था कि दिवाली पर जैसे ही विक्की अमेरिका से घर पहुंचेंगे, तुरंत रिश्ते की बात पक्की कर दी जाएगी। इसके बाद दिवाली के तुरंत बाद शादी की तैयारियां शुरू कर दी जातीं। पूरा परिवार इस उम्मीद में था कि इस बार की दिवाली घर में दोगुनी खुशियां और रौनक लेकर आएगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
15 दिन के इंतजार के बाद रविवार को पहुंचा शव
विक्की घर तो लौटे, लेकिन अपने पैरों पर चलने की बजाय ताबूत के अंदर बंद होकर आए। 15 दिन के लंबे और दर्दनाक इंतजार के बाद रविवार को जब उनका शव पिहोवा स्थित सिकंदरा कॉलोनी के घर में दाखिल हुआ, तो चीख-पुकार मच गई। पिता कश्मीरी लाल, चाचा राजकुमार, भाई और अन्य परिजन शव से लिपटकर बिलख पड़े और शादी के तमाम अरमान आंसुओं में बह गए।
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