दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। याचिका में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को एक बाध्यकारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि भीड़ नियंत्रण और प्रदर्शन प्रबंधन की ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरे (BWC) अनिवार्य किए जाएं। साथ ही, ड्यूटी के दौरान इन कैमरों को हर समय चालू रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

वकील चाहत राघव द्वारा दायर याचिका में बॉडी-वॉर्न कैमरों से रिकॉर्ड किए गए फुटेज के स्टोरेज, डेटा की इंटीग्रिटी, रिटेंशन अवधि और सबूत के तौर पर इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक व्यवस्था बनाने की भी मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि जरूरी BWC फ्रेमवर्क की कमी से संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b) और 21 के तहत नागरिकों को मिले मौलिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद PIL दाखिल

यह याचिका जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर दायर की गई है। इसमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भागीदारी का उल्लेख किया गया है। याचिका के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) पर कथित रूप से जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने के आरोप लगे। वहीं, पुलिसकर्मियों पर पथराव, तोड़फोड़ और हमले के भी आरोप लगाए गए।

याचिकाकर्ता ने उठाया जवाबदेही का सवाल

याचिकाकर्ता चाहत राघव का कहना है कि घटनाओं से जुड़े ज्यादातर वीडियो किसी आधिकारिक और प्रमाणित पुलिस रिकॉर्डिंग सिस्टम से नहीं, बल्कि मौके पर मौजूद लोगों के मोबाइल फोन से सामने आए। उनका तर्क है कि ऐसी स्थिति में कथित पुलिस ज्यादती की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ कथित हिंसक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सबूत जुटाने के लिए अनौपचारिक नागरिक वीडियोग्राफी पर निर्भर रहना पड़ता है।

22 जुलाई के आदेश का दिया हवाला

याचिका में 22 जुलाई के एक आदेश का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें CCTV फुटेज और वीडियोग्राफी समेत उपलब्ध जरूरी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था। राघव का तर्क है कि आदेश में वीडियोग्राफी का विशेष उल्लेख इस बात को दर्शाता है कि पुलिस के पास घटनाओं की रिकॉर्डिंग के लिए एक व्यापक और अनिवार्य अधिकारी-आधारित रिकॉर्डिंग सिस्टम की कमी है।

बॉडी-वॉर्न कैमरा सिस्टम को अनिवार्य करने की मांग

याचिका के अनुसार, घटनाओं के दौरान रिकॉर्ड की गई फुटेज से भीड़ में उन लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जिन पर पथराव, तोड़फोड़ या पुलिसकर्मियों पर हमला करने के आरोप हैं। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने कहा है कि बॉडी-वॉर्न कैमरा सिस्टम पुलिस और आम लोगों के बीच होने वाली बातचीत को वास्तविक रूप से रिकॉर्ड कर सकता है और बैरिकेड के दोनों तरफ मौजूद लोगों की सुरक्षा तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने में मददगार हो सकता है।

राघव ने तर्क दिया कि वर्ष 2020 की एडवाइजरी केवल सलाह देने तक सीमित थी। इसमें कैमरे अनिवार्य रूप से सक्रिय रखने, न्यूनतम फुटेज रिटेंशन अवधि, चेन ऑफ कस्टडी से जुड़े सुरक्षा उपायों और कैमरे का इस्तेमाल नहीं करने की स्थिति में कार्रवाई जैसे प्रावधान स्पष्ट रूप से तय नहीं किए गए थे। याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर की घटनाएं दिखाती हैं कि वैकल्पिक या स्वैच्छिक BWC व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। ऐसे में एक बाध्यकारी और स्पष्ट BWC फ्रेमवर्क की जरूरत है।

याचिका में स्टैंडिंग ऑर्डर पर उठाए सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि मौजूदा स्टैंडिंग ऑर्डर में रिकॉर्ड किए गए फुटेज के स्टोरेज, उसकी इंटीग्रिटी, एक्सेस और चेन ऑफ कस्टडी को लेकर पर्याप्त व्यवस्था तय नहीं की गई है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि दिल्ली पुलिस ने बॉडी-वॉर्न कैमरे खरीदे हैं या खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन भीड़ नियंत्रण और प्रदर्शन प्रबंधन के दौरान इनके इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए कोई स्पष्ट नियामक ढांचा नहीं बनाया गया।

फुटेज सुरक्षित रखने के लिए तय प्रोटोकॉल की मांग

राघव का कहना है कि बॉडी-वॉर्न कैमरों से रिकॉर्ड फुटेज को एक निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत तैयार और सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इसमें हैश वैल्यू, सुरक्षित सर्वर पर अपलोड की व्यवस्था, कैमरा पहनने वाले अधिकारी की फुटेज में बदलाव करने की पहुंच पर रोक, ऑडिट योग्य चेन ऑफ कस्टडी और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63 के तहत आवश्यक प्रमाणन जैसे सुरक्षा उपाय शामिल किए जाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य केवल भीड़ नियंत्रण और प्रदर्शन प्रबंधन के दौरान जवाबदेही सुनिश्चित करना है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इससे शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार पर अंकुश लगाने के बजाय उसे संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

पुलिस और RAF के लिए अनिवार्य BWC सिस्टम की मांग

याचिका में केंद्र, दिल्ली पुलिस और RAF के अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे भीड़ नियंत्रण और विरोध-प्रदर्शन प्रबंधन में तैनात पुलिस तथा RAF कर्मियों के लिए अनिवार्य और लागू करने योग्य बॉडी-वॉर्न कैमरा सिस्टम तैयार करें। इसमें कैमरों के इस्तेमाल, रिकॉर्डिंग, फुटेज के संरक्षण और उसके सबूत के तौर पर इस्तेमाल से जुड़े स्पष्ट नियम तय करने की मांग की गई है।

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