दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर इलाके को ‘नो-हॉकिंग जोन’ और ‘नो-वेंडिंग जोन’ घोषित किया है। कोर्ट ने कहा कि 12 अक्टूबर के बाद नगर निगम (MCD) इस क्षेत्र से सभी अनधिकृत वेंडरों को हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि अनधिकृत वेंडरों को हटाने की कार्रवाई पूरी होने के बाद दिल्ली फायर सर्विस डिस्ट्रिक्ट सेंटर का निरीक्षण करे और इसकी रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष दाखिल करे। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को भी निर्देश दिया कि आदेश के प्रभावी पालन के लिए वह MCD और DDA के साथ आवश्यक सहयोग करे। अदालत के इस आदेश के बाद नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर में अनधिकृत वेंडिंग और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

12 अक्टूबर के बाद MCD कर सकेगा कार्रवाई

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की पीठ ने 5 अक्टूबर को पारित आदेश में कहा कि चिन्हित हिस्से को छोड़कर पूरे नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर को ‘नो-हॉकिंग जोन’ और ‘नो-वेंडिंग जोन’ घोषित किया जाता है। अदालत ने कहा कि 12 अक्टूबर 2026 के बाद MCD क्षेत्र में कार्रवाई करने और सभी अनधिकृत वेंडरों को हटाने के लिए स्वतंत्र होगा। पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि निर्धारित हिस्से को छोड़कर डिस्ट्रिक्ट सेंटर के बाकी क्षेत्र में अनधिकृत वेंडिंग की अनुमति नहीं होगी। आदेश के बाद MCD को तय तारीख के बाद कार्रवाई करने का अधिकार मिल गया है।

MCD को वेंडरों के लिए व्यावहारिक विकल्प देने की जिम्मेदारी

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि यदि स्ट्रीट वेंडर ‘नो-वेंडिंग जोन’ में कारोबार कर रहे हैं, तो MCD या संबंधित प्राधिकरण की जिम्मेदारी है कि उन्हें निर्धारित वेंडिंग जोन में स्थानांतरित करने में मदद की जाए। साथ ही, उन्हें आजीविका जारी रखने के लिए व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

400 से ज्यादा वेंडर, सिर्फ 90 अधिकृत

हाई कोर्ट नेहरू प्लेस इलाके में वेंडिंग और हॉकिंग से जुड़े कई मामलों की सुनवाई कर रहा था। इनमें एक अवमानना याचिका भी शामिल है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर में फिलहाल 400 से अधिक वेंडर सामान बेच रहे हैं। इनमें से केवल 90 वेंडर ही अधिकृत हैं, जबकि बाकी बिना अनुमति के कारोबार कर रहे हैं।

कई बेंच पहले भी दे चुकी हैं आदेश

हाई कोर्ट ने कहा कि 90 अधिकृत वेंडरों के अलावा नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर में किसी अन्य वेंडर के पास सामान बेचने का वैध अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि उसकी कई बेंच पहले भी नेहरू प्लेस को ‘नो-हॉकिंग जोन’ और ‘नो-वेंडिंग जोन’ घोषित करने के आदेश दे चुकी हैं।

वेंडरों को 12 अक्टूबर तक की मोहलत

अदालत ने कहा कि नेहरू प्लेस में कई वर्षों से हॉकरों और वेंडरों की मौजूदगी विवाद का विषय बनी हुई है। कोर्ट ने 90 अधिकृत वेंडरों को 12 अक्टूबर तक का समय देते हुए उसके बाद पास की एक वैकल्पिक जगह से वेंडिंग करने की अनुमति दी है। अदालत ने साथ ही कहा कि टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC)-II के गठन के बाद यह तय किया जाना चाहिए कि ये वेंडर वेंडिंग सर्टिफिकेट पाने के योग्य हैं या नहीं। यदि वे पात्र पाए जाते हैं, तो कमेटी यह भी तय करेगी कि उन्हें किस क्षेत्र में वेंडिंग की अनुमति दी जाएगी।

 दो महीने के भीतर निर्णय लेने के निर्देश

हाई कोर्ट ने कहा कि TVC-II के गठन के दो महीने के भीतर 90 वेंडरों की पात्रता और वेंडिंग से जुड़े मामलों पर निर्णय लिया जाना चाहिए। कमेटी को अपना फैसला उन वेंडरों को भी बताना होगा, जिन्हें वैकल्पिक स्थान पर वेंडिंग की अनुमति दी गई है। यह पूरी प्रक्रिया ‘स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका की सुरक्षा और स्ट्रीट वेंडिंग का विनियमन) अधिनियम’ के प्रावधानों के तहत की जाएगी। यह मामला 2009 के एक फैसले से जुड़ा है। उस फैसले के तहत शुरुआत में 67 वेंडरों को नेहरू प्लेस के एक चिन्हित क्षेत्र में वेंडिंग की अनुमति दी गई थी। बाद में हाई कोर्ट ने पूरे डिस्ट्रिक्ट सेंटर को ‘नो-हॉकिंग जोन’ और ‘नो-वेंडिंग जोन’ घोषित कर दिया। इसके बाद इस व्यवस्था को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया।

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