लखनऊ. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है. यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने जिले के मौजूदा डीएम आलोक कुमार और पूर्व डीएम ज्ञानेंद्र सिंह से स्पष्टीकरण मांगा है. वहीं, शासन ने शुक्रवार को जिले में तैनात एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को पद से हटा दिया. दोनों के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज हो चुकी है.
जांच में सामने आया कि मतदाताओं के पहचान पत्र यानी EPIC नंबर पर दूसरे लोगों का विवरण दर्ज था. इस मामले में 10,470 त्रुटिपूर्ण आवेदन स्वीकृत होने की बात सामने आई. इतनी बड़ी संख्या में गड़बड़ी मिलने से मतदाता सूची की जांच और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े हुए हैं.
इसे भी पढ़ें- गोरखपुर AIIMS की निदेशक को इलाज के लिए जाना पड़ा प्राइवेट अस्पताल, 5 साल बाद भी कैथ लैब नहीं
कांग्रेस ने उठाया था वोटर लिस्ट का मुद्दा
कांग्रेस ने 21 अक्टूबर को यूपी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सवाल उठाए थे. पार्टी ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में हजारों वोटों में गड़बड़ी का आरोप लगाया था. इसके बाद CEO ने संबंधित ERO और VRC ऑपरेटर को हटाने का निर्देश दिया था. अब मौजूदा और पूर्व डीएम से भी जवाब मांगा गया है.
10,470 आवेदन स्वीकृत होने पर सवाल
जांच में बड़ी संख्या में गलत आवेदन स्वीकृत होने की बात सामने आई. सवाल यह है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी के दौरान आवेदन की जांच किस स्तर पर हुई? जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में यह चूक कैसे हुई? चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिहाज से इन सवालों का जवाब जरूरी है.
बलरामपुर में 32 नाम हटाने पर हाईकोर्ट सख्त
उधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बलरामपुर में पंचायत मतदाता सूची से 32 नाम कथित रूप से गलत तरीके से हटाने के मामले में राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है. कोर्ट ने 47 लोगों को भी नोटिस जारी किया है, जिनके नाम गलत तरीके से जोड़ने का आरोप है. अमेठी में हटाए गए 138 नामों में से 136 को सही किए जाने की जानकारी भी कोर्ट को दी गई.
इसे भी पढ़ें- वाराणसी-दिल्ली वंदे भारत स्लीपर आज से शुरू, जानिए किराया और सुविधाएं; 3,024 रुपये तक होगा टिकट
फॉर्म-7 की जांच का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 जमा किए जाने के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जांच का निर्देश दिया है. कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया की याचिका में आरोप लगाया गया था कि खास समुदाय के मतदाताओं के नाम हटवाने के लिए फॉर्म-7 जमा किए गए. कोर्ट ने आयोग से जांच कर जरूरी सुधार करने को कहा है.

