Automobile Desk : केंद्र सरकार देश में हरित ईंधन को बढ़ावा देने और परिवहन प्रणाली को अधिक आधुनिक बनाने के उद्देश्य से मोटर वाहन नियमों में बड़े बदलाव करने जा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन के लिए एक नया मसौदा जारी किया गया है। इस नए ड्राफ्ट के तहत इलेक्ट्रिक (EV), सीएनजी (CNG) और हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली गाड़ियों की निर्धारित संचालन अवधि को 5 वर्ष तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त, नेशनल परमिट, अस्थाई पंजीकरण और गाड़ियों से जुड़े कागजातों को पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की योजना बनाई गई है।

मंत्रालय की इस पहल का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण-अनुकूल वाहनों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना और वाहन मालिकों को कागजी प्रक्रियाओं की जटिलताओं से राहत देना है। प्रस्तावित मसौदे में यह स्पष्ट किया गया है कि बैटरी, प्राकृतिक गैस और हाइड्रोजन चालित व्यावसायिक या निजी वाहनों को अब पहले से अधिक समय तक चलने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, अलग-अलग श्रेणियों की गाड़ियों की अधिकतम सीमा क्या होगी, इसका विस्तृत ब्योरा अंतिम अधिसूचना जारी होने के साथ स्पष्ट किया जाएगा। सरकार ने इस ड्राफ्ट पर जनता और हितधारकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव व आपत्तियां आमंत्रित की हैं।
परमिट प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए राष्ट्रीय परमिट व्यवस्था को भी डिजिटल रूप दिया जा रहा है। नए प्रस्ताव के अनुसार, मालवाहक गाड़ियों के लिए नेशनल परमिट अब इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सीधे 5 साल तक की अवधि के लिए जारी किया जा सकेगा। वाहन मालिक अपनी आवश्यकता के आधार पर समय सीमा का चयन कर सकेंगे, जिसके लिए ₹16,500 प्रति वर्ष का शुल्क निर्धारित किया गया है। वर्तमान व्यवस्था में मल्टी-एक्सल मालवाहक गाड़ियों के लिए 15 वर्ष और अन्य श्रेणियों के लिए 12 वर्ष की सीमा लागू है, जिसे अब पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टल से प्रबंधित किया जाएगा।
अस्थाई पंजीकरण (Temporary Registration) के नियमों में भी व्यावहारिक बदलाव किए गए हैं। बिना बॉडी वाले चेसिस का अस्थाई पंजीकरण अब जारी होने की तिथि से 6 महीने तक मान्य रहेगा। यदि बॉडी निर्माण में देरी होती है या वाहन वर्कशॉप में अटका रहता है, तो संबंधित अधिकारी इसे 30-30 दिनों की अवधि के लिए आगे बढ़ा सकेंगे। वहीं, पूर्ण निर्मित गाड़ियों को अनुकूलित (adapted) वाहनों में बदलने या अन्य राज्यों में पंजीकृत कराने की स्थिति में अस्थाई पंजीकरण की वैधता 45 दिनों की होगी।
सुरक्षा और पहचान प्रणाली को मजबूत करने के लिए वाहन पोर्टल पर आधार लिंक मोबाइल नंबर, जीएसटी, पैन और कॉरपोरेट पहचान नंबर (CIN) जैसी जानकारियों को अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा। गाड़ियों के लोन, हाइपोथिकेशन और फिटनेस प्रमाण पत्र से जुड़े आंकड़े भी फॉर्म 48 के तहत डिजिटल डेटाबेस में शामिल रहेंगे। इसके साथ ही वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) से मान्यता प्राप्त ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं और R&D कंपनियों को भी ट्रेड सर्टिफिकेट नियमों के दायरे में लाया जा रहा है।


