शरद पाठक,छिंदवाड़ा। कहते हैं कि जोड़े तो ऊपर से तय होते हैं और शादी का बंधन सात जन्मों का होता है। हिंदू धर्म की यह मान्यता आज शहर में चरितार्थ प्रतीत हुई है। बुजुर्ग दंपती ने एकसाथ प्राण त्यागे और दंपती की अर्थी भी एकसाथ उठी।

दरअसल शहर के चांद में रहने वाले गणेश लाल गुप्ता (95 ) का रविवार शाम को 6 बजे निधन हो गया था। उसके 6 घंटे बाद ही रात करीब 12 बजे उनकी धर्मपत्नी गीता गुप्ता (85) की सांसे भी थम गईं। वे अपने पति की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई और पति के सिरहाने में ही रोते बिलखते उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।

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घर के दो बुजुर्गों के एक साथ निधन के बाद दुखी परिजनों ने बुजुर्ग दंपती की अर्थी एक साथ उनके घर से स्थानीय मोक्षधाम के लिए बैंड बाजों के साथ निकाली गई। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों ने सम्मिलित होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

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दंपती के पुत्र राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने बताया कि उनके माता-पिता हमेशा साथ ही भोजन करते थे। उनका यह नियम पूरे जीवन भर चला। पिता की मौत के बाद उनकी मां यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई और उन्होंने अपने पति के पास बैठकर ही प्राण त्याग दिए।

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