वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिले के रहुई प्रखंड अंतर्गत पेशौर और उत्तरनावां पंचायत में ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए ‘सहयोग शिविर’ का आयोजन किया गया। पेशौर पंचायत में आयोजित शिविर का निरीक्षण डीडीसी सारा अशरफ ने किया। उन्होंने विभिन्न विभागों के स्टॉलों की जांच की, आवेदनों की समीक्षा की और तैयार प्रमाण पत्रों का वितरण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं भी ध्यानपूर्वक सुनीं।
पीएम आवास सूची को लेकर नाराजगी
शिविर के दौरान पीएम आवास योजना की सूची में नाम न होने का मुद्दा प्रमुखता से उभरा। पेशौर पंचायत के मुखिया आशीष कुमार ने बताया कि शिविर में कुल 9 आवेदन आए, जिनमें 4 आवास योजना और 5 आईसीडीएस से जुड़े थे, जिनका मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया। हालांकि, उन्होंने चिंता व्यक्त की कि पंचायत में 600 से अधिक लोगों का सर्वे हुआ था, लेकिन सूची में केवल 300 से अधिक नाम ही शामिल किए गए हैं। पात्र होने के बावजूद सूची से नाम गायब होने पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, जिसका सामना जनप्रतिनिधियों को भी करना पड़ रहा है।

उत्तरनावां पंचायत में 17 आवेदनों का निष्पादन
दूसरी ओर, उत्तरनावां पंचायत में आयोजित शिविर में कुल 17 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें ओडीएफ के 7, राजस्व के 8, सामाजिक सुरक्षा का 1 और शिक्षा विभाग का 1 आवेदन शामिल था, जिन्हें अधिकारियों द्वारा निष्पादित कर दिया गया। बीडीओ धर्मराज कुमार ने छूटे हुए पीएम आवास आवेदकों को आवश्यक कागजातों के साथ प्रखंड कार्यालय में आवेदन जमा करने का सुझाव दिया। मुखिया सरयुग प्रसाद सिन्हा ने कहा कि शिविर से लोगों को गांव में ही सुविधाएं मिल रही हैं।
कब मिलेगा हक?
शिविर में बीपीआरओ शशि कुमार, पीओ शैलेंद्र प्रसाद, सीडीपीओ जया कुमारी और श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सुमित कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि, इन शिविरों के बावजूद मुख्य सवाल यही बना हुआ है कि पीएम आवास योजना से छूटे पात्र गरीबों को उनका पक्का मकान कब और कैसे मिलेगा?

