Godawan Conservation Jaisalmer: राजस्थान के जैसलमेर से एक बेहद सुकून देने वाली खबर सामने आई है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम के 133वें एपिसोड में जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाकों की पहचान गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के संरक्षण प्रयासों की जमकर सराहना की।

एक वक्त था जब यह पक्षी खत्म होने की कगार पर खड़ा था, लेकिन अब ब्रीडिंग सेंटर्स की मेहनत रंग ला रही है। पीएम की इस तारीफ के बाद जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) के स्टाफ और स्थानीय लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।

प्रधानमंत्री से मिली इस शाबाशी के बाद डीएफओ बृजमोहन गुप्ता ने खुशी जाहिर करते हुए इसे पूरी टीम के लिए गर्व का विषय बताया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सुदासरी और रामदेवरा के प्रजनन केंद्रों में वैज्ञानिक और ग्राउंड स्टाफ दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। डीएफओ का कहना है कि पीएम के जिक्र के बाद अब हमारी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। प्रशासन ने अब अगला लक्ष्य तय किया है कि सेंटर में पैदा हुए इन पक्षियों को जल्द ही धीरे-धीरे खुले और प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने की तैयारी की जाएगी।

सिर पर काला ताज और शाही पहचान

आपको बता दें कि गोडावण कोई साधारण पक्षी नहीं है, इसे राजस्थान की शान माना जाता है। इसकी पहचान इसके सिर पर मौजूद काले ताज से होती है। करीब 100 सेंटीमीटर ऊँचा और 15 से 18 किलो वजनी यह पक्षी भारत के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में गिना जाता है। इसके पंखों का फैलाव इतना बड़ा होता है कि जब यह उड़ता है तो आसमान में एक अलग ही नजारा दिखता है। नर गोडावण की छाती पर एक काली पट्टी होती है जो इसे और भी आकर्षक बनाती है।

गोडावण की सबसे खास बात इसकी खान-पान की आदतें हैं। यह मौसम के हिसाब से खुद को ढाल लेता है। इसके खाने में घास के बीज से लेकर टिड्डे और भृंग जैसे कीड़े शामिल होते हैं। मौका मिलने पर यह छोटे चूहे (कृंतक) और रेंगने वाले जीवों (सरीसृप) को भी अपना निवाला बना लेता है। जैसलमेर के धोरों में इन्हें बचाने के लिए सरकार और स्थानीय समुदाय कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं।

प्रशासन अब इस बात पर जोर दे रहा है कि गोडावण के रहने वाले इलाकों में बिजली के तारों और अन्य खतरों को कम किया जाए ताकि इनकी संख्या में और तेजी से इजाफा हो सके। जैसलमेर की इस सफलता ने आज पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

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