नई दिल्ली/चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी से बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की शनिवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अहम मुलाकात हुई। दोनों नेताओं के बीच हुई वन-टू-वन बैठक ने पंजाब की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। खास बात यह है कि पिछले करीब 36 घंटे में प्रधानमंत्री मोदी और राघव चड्ढा की यह दूसरी महत्वपूर्ण मुलाकात बताई जा रही है।
मुलाकात के बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री के साथ अपनी तस्वीर साझा की। उन्होंने इस मुलाकात को यादगार बताते हुए प्रधानमंत्री के समय, मार्गदर्शन और विचारों के लिए आभार जताया।
पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ी राजनीतिक अटकलें
राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से पंजाब से जुड़े राजनीतिक मुद्दों को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी लगातार मुलाकातों को पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी पंजाब में राघव चड्ढा की लोकप्रियता, संगठनात्मक समझ और राज्य की राजनीति की जानकारी का इस्तेमाल बड़े स्तर पर कर सकती है।
2027 के चुनाव में मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बीजेपी अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटी है। पार्टी के लिए राघव चड्ढा इसलिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि उन्हें पंजाब की राजनीति और आम आदमी पार्टी के कामकाज की अंदरूनी समझ है।
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भी राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी की चुनावी रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी। अब बीजेपी में आने के बाद पार्टी उनके अनुभव को अपने चुनावी अभियान में इस्तेमाल कर सकती है।
स्टार प्रचारक के तौर पर दिख सकते हैं राघव चड्ढा
बीजेपी पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाने की तैयारी में है। ऐसे में राघव चड्ढा पार्टी के लिए एक प्रभावी चेहरे के तौर पर सामने आ सकते हैं।
उनकी सबसे बड़ी ताकत यह मानी जा रही है कि वह आम आदमी पार्टी की राजनीति, नेतृत्व और चुनावी रणनीति को करीब से समझते हैं। बीजेपी इस अनुभव को पंजाब में अपने पक्ष में इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकती है।
शहरी और युवा मतदाताओं पर बीजेपी की नजर
राघव चड्ढा की पकड़ खास तौर पर शहरी और युवा वर्ग के बीच मानी जाती है। अमृतसर, लुधियाना और जालंधर जैसे बड़े शहरों में कारोबारी और मध्यम वर्ग के मतदाताओं तक उनकी पहुंच को बीजेपी के लिए अहम माना जा रहा है।
युवा नेता होने के साथ-साथ हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी पर उनकी अच्छी पकड़ भी उनके राजनीतिक संवाद को प्रभावी बनाती है। सोशल मीडिया पर सक्रियता के कारण वह युवा और डिजिटल वोटरों के बीच भी अपनी अलग पहचान रखते हैं।
सुखबीर बादल की पीएम मोदी से मुलाकात ने बढ़ाया सियासी सस्पेंस
राघव चड्ढा की पीएम मोदी से मुलाकात से एक दिन पहले शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। लगातार हो रही इन मुलाकातों ने पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों की अटकलों को और हवा दे दी है।
बीजेपी और अकाली दल के पुराने राजनीतिक संबंधों को देखते हुए पंजाब में भविष्य के गठजोड़ को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।
क्या राघव चड्ढा होंगे बीजेपी के ‘गेम चेंजर’?
अकाली दल से अलग होने के बाद बीजेपी पंजाब में अपने दम पर राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी की नजर खास तौर पर शहरी सीटों और नए युवा मतदाताओं पर है।
ऐसे में राघव चड्ढा बीजेपी के लिए एक ऐसा चेहरा बन सकते हैं, जो पार्टी को आम आदमी पार्टी के खिलाफ सीधे राजनीतिक मुकाबले में मदद करे। आने वाले समय में उन्हें पंजाब के चुनावी अभियान में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
पंजाब चुनाव 2027 के लिए बीजेपी की बड़ी तैयारी
राघव चड्ढा की पीएम मोदी से मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। लगातार बढ़ती उनकी राजनीतिक सक्रियता और पंजाब को लेकर बीजेपी की रणनीति के बीच यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है।
अगर बीजेपी उन्हें स्टार प्रचारक या चुनावी अभियान से जुड़ी कोई बड़ी जिम्मेदारी देती है, तो पंजाब की राजनीति में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राघव चड्ढा 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए वह ‘एक्स फैक्टर’ साबित होंगे, जिसकी पार्टी लंबे समय से तलाश कर रही है।
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