लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल काफी गरम था, लेकिन इसी बीच एक हल्का और मजाकिया पल भी देखने को मिला. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने चर्चा के दौरान ऐसा तंज कसा कि पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा. यह टिप्पणी उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर देखते हुए की, जिस पर वे भी मुस्कुराने लगे. इस घटना ने गंभीर बहस के बीच माहौल को कुछ देर के लिए हल्का कर दिया.
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान सियासी गर्मी के बीच हल्का-फुल्का माहौल भी देखने को मिला. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने चाणक्य का नाम लेकर गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसा, जिस पर सदन में ठहाके गूंज उठे.
लोकसभा में गुरुवार को महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने मजाकिया अंदाज में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर एक तंज कसा, जिसे सुनकर वह भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए. बहस के दौरान प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा केवल अधिकारों से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसमें राजनीति भी नजर आती है.
इसी दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए अमित शाह की ओर देखा और कहा कि अगर आज चाणक्य जिंदा होते, तो वे भी हैरान हो जाते. उन्होंने कहा कि आपकी रणनीति देखकर चाणक्य भी प्रभावित हो जाते. उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से जोरदार हंसी सुनाई दी और खुद अमित शाह भी हंसते नजर आए.
प्रियंका गांधी ने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण का कदम वास्तव में केंद्र की एनडीए सरकार का पॉलिटिकल ट्रंप कार्ड है, जिसके जरिए वह चुनावों में लाभ लेना चाहती है.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले के संबोधन का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा महिलाओं के अधिकारों की हिमायती रही है. प्रियंका ने बोलते-बोलते अमित शाह की ओर देखा, वह मुस्कुरा रहे थे. इस पर प्रियंका गांधी की भी हंसी छूट गई. उन्होंने हंसते हुए कहा, ‘हंस रहे हैं… गृह मंत्री जी हंस रहे हैं. पूरी तैयारी बना रखी है आपने. आज चाणक्य अगर आज जिंदा होते तो वो भी चौंक जाते, आपकी कुटिलता की दाद देते.’
उनके इतना कहने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से जमकर ठहाके लगे. प्रियंका गांधी और अमित शाह भी हंस रहे थे. कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव आयोग, न्यायपालिका और मीडिया जैसी संस्थाओं पर दबाव बना रही है.
वायनाड सांसद ने यह भी पूछा कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता. उन्होंने कहा, ‘अगर यह संविधान संशोधन विधेयक पारित हो गया, तो इस देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा.’
प्रियंका गांधी ने आगे कहा, ‘1931 में सरदार वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता में कराची में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ, जहां यह प्रस्ताव पारित किया गया. यहीं से महिलाओं के समान अधिकार हमारे देश की राजनीति का हिस्सा बने. उसी समय वन वोट, वन सिटिजन, वन वैल्यू का सिद्धांत भी स्थापित हुआ.’ प्रियंका ने कहा कि नगरपालिकाओं और पंचायतों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रावधान सबसे पहले उनके दिवंगत पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने सदन में पेश किया था.
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