नासिक से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत पहुंच गया है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है जिसे पहले से लंबित स्वत: संज्ञान मामले के तहत पेश किया गया है। याचिका में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि नासिक में कथित तौर पर एक ‘संगठित धर्मांतरण रैकेट’ सक्रिय है जिसने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि यह कोई एकल या अलग-थलग घटना नहीं है बल्कि एक सुनियोजित और व्यवस्थित अभियान का हिस्सा है।
नासिक TCS का धर्मांतरण का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस मामले में एक अर्जी दाखिल की गई है, जिसमें की गंभीर आरोप लगाए गए हैं और दो बड़ी मांग की गई है. याचिका में इस मामले को पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला बताया गया है.
नासिक में एक बड़ा धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया, जिसने पूरे देश में हलचल मचा दी. अब यह मामला सीधे देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. एक याचिका दाखिल की गई है जिसमें कहा गया है कि जबरदस्ती या धोखे से धर्म बदलवाना सिर्फ एक धार्मिक मामला नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए खतरा है.
सुप्रीम कोर्ट में पहले से धर्म परिवर्तन से जुड़ा एक स्वतः संज्ञान मामला चल रहा है. स्वतः संज्ञान का मतलब है कि अदालत ने खुद ही इस मुद्दे को संज्ञान में लिया था. अब नासिक के TCS मामले को लेकर उसी केस में एक नई अर्जी दाखिल की गई है. याचिका दाखिल करने वाले वकील ने अदालत में कहा कि नासिक का यह संगठित धर्म परिवर्तन का मामला पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख देने वाला है.
याचिका में पहली बात यह कि जबरदस्ती या धोखे से धर्म बदलवाना देश के लिए एक गंभीर खतरा है. दूसरी बात यह कि जब यह काम किसी बड़े संगठित और दबाव बनाकर चलाए जा रहे अभियान के तहत होता है तो इसे ‘आतंकवादी कृत्य’ माना जाना चाहिए. तीसरी बड़ी बात यह कही गई है कि यह जबरन या धोखे से धर्म बदलवाना कोई अकेली धार्मिक घटना नहीं है बल्कि एक ‘सुनियोजित षड्यंत्र’ है.
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि ऐसे कथित धर्मांतरण अभियानों को विदेशों से आर्थिक सहायता मिलती है जिसका उद्देश्य देश की जनसांख्यिकीय संरचना को प्रभावित करना और भारत की एकता, अखंडता व सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करना है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से दो बड़ी मांगें की गई हैं. पहली मांग यह है कि केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए जाएं ताकि धोखे या जबरदस्ती से होने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाई जा सके. दूसरी मांग यह है कि केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया जाए कि धर्म परिवर्तन के मामलों को सुनने के लिए अलग से स्पेशल कोर्ट यानी विशेष अदालतें बनाई जाएं.
आपको बताते चले कि सुप्रीम कोर्ट में पहले से धर्म परिवर्तन से जुड़ा एक स्वतः संज्ञान मामला चल रहा है. स्वतः संज्ञान का मतलब है कि अदालत ने खुद ही इस मुद्दे को संज्ञान में लिया था. नई याचिका में यह भी मांग उठाई गई है कि जबरन या धोखे से कराए जाने वाले धर्मांतरण खासकर जब वे संगठित तरीके से और दबाव डालकर किए जाएं तो उन्हें ‘आतंकी कृत्य’ (terrorist act) की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए।
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