जुबैर अंसारी, सुपौल। भारत-नेपाल सीमा पर कड़े सुरक्षा प्रबंधों और नेपाल में पिछले पांच दिनों से जारी सांप्रदायिक तनाव के बीच एक बड़ी घटना सामने आई है। वीरपुर थाना क्षेत्र के खोंटाहा इलाके में बिहार पुलिस ने भारी मात्रा में मादक पदार्थ पकड़ा है। सीमा सील होने और चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों के पहरे के बावजूद 386 किलोग्राम गांजा बरामद होने से स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था और एसएसबी की कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

​गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

​सुपौल पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वीरपुर थानाध्यक्ष संजय दास के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया था। इस टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए खोंटाहा गांव के समीप एनएच 106 के उत्तर नेपाल सीमा के पास स्थित प्रदीप मटियेत के परती खेत में छापेमारी की। वहां से पुलिस ने कुल 11 प्लास्टिक के बोरों में छिपाकर रखे गए 386 किलोग्राम गांजे की भारी खेप को बरामद किया। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही तस्कर मौके से फरार होने में कामयाब हो गए। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात तस्करों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है और उनकी गिरफ्तारी के लिए स्थानीय मुखबिरों के साथ-साथ तकनीकी अनुसंधान भी शुरू कर दिया है।

​एसडीपीओ का बयान और तस्करों की धरपकड़ के प्रयास

​इस बड़ी बरामदगी के बाद वीरपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) सुरेंद्र कुमार ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि यह अभियान आगे भी सख्ती से चलाया जाएगा और किसी भी तस्कर को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अवैध धंधे में कौन-कौन लोग शामिल हैं और उनके स्थानीय मददगार कौन हैं।

​एसएसबी की निगरानी पर उठे सवाल

​इस बड़ी खेप के पकड़े जाने के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों के आम लोगों के बीच यह चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि जब नेपाल में तनाव के कारण सीमा पूरी तरह सील है और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवान अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं, तब इतनी भारी मात्रा में मादक पदार्थ भारतीय सीमा के अंदर तक कैसे पहुंच गया? स्थानीय निवासियों का मानना है कि यह मामला सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। इस मामले की उच्च स्तरीय और गहन जांच से ही यह खुलासा हो सकेगा कि यह तस्करों का नेटवर्क कितना मजबूत है और यह खेप किस रास्ते से भारतीय क्षेत्र में दाखिल हुई।