दुर्ग। 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा में दुर्ग जिले में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के तरह-तरह के कारण बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक रूप से जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने प्राचार्यों की बैठक लेकर कमजोर परिणाम की नब्ज टटोलने की कोशिश की है। बैठक के बाद कमजोर रिजल्ट देने वाले प्राचार्यों से स्पष्टीकरण मांगा गया।

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स्पष्टीकरण में जो तथ्य उभर कर आया है, उसमें ज्यादातर प्राचार्यों ने कहा है कि उनकी नई पोस्टिंग हुई थी, तब स्कूल में परीक्षा का माहौल था। पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। वहीं विभागीय अधिकारियों ने कमजोर परीक्षा परिणाम जो वजह बता रहे हैं, उनमें व्याख्याताओं का प्राचार्य पद पर प्रमोशन, शैक्षणिक सत्र के बीच प्रशिक्षण, एसआईआर में शिक्षकों की संलिप्तता तथा पूरे सत्र के दौरान शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण प्रमुख है।

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दुर्ग जिले 194 व्याख्याताओं को प्राचार्य पद पर प्रमोशन दिया गया। इनमें से 8 व्याख्याता को छोड़ दें तो बाकी 186 व्याख्याता स्कूल में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इनका प्रमोशन भले ही नवम्बर माह में हुआ, लेकिन प्रमोशन की आस में सितंबर माह से ही मनोवैज्ञानिक रूप से प्राचार्य पद संभालने के लिए तैयार थे। जाहिर है इसका थोड़ा बहुत असर पढ़ाई पर हुआ। इसके अलावा करीब 56 व्याख्याता युक्तियुक्तकरण की चपेट में आ गए। कुल मिलाकर करीब 250 व्याख्याता स्कूल से बेदखल हो गए। इतनी बड़ी संख्या में व्याख्याताओं के स्कूल से चले जाने से पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई।

पिछले शैक्षणिक सत्र के शुरू होते ही स्कूल तथा शिक्षकों युक्तियुक्तकरण शुरू हो गया। यह पूरे सत्र में चलता रहा, जिसके कारण अधिकारी इसमें उलझे रहे। इस बीच शिक्षकों का प्रशिक्षण तथा गैर शैक्षणिक कार्य भी संचालित होते रहे। गैर शैक्षणिक कार्यों में एसआईआर प्रमुख था।

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