चंडीगढ़। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चिकित्सा लापरवाही के बिना डॉक्टरों पर आपराधिक मुकद्दमे चलाने के खिलाफ चेतावनी दी है। जस्टिस मनीषा बत्रा ने 2015 में प्रसव के बाद महिला की मौत के मामले में डॉक्टरों के खिलाफ आई.पी.सी. धारा 304 ए के तहत कार्रवाई रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी या शिकायतकर्त्ता चिकित्सा विज्ञान के विशेषज्ञ नहीं हो सकते, इसलिए स्वतंत्र विशेषज्ञ राय (जैसे सरकारी डॉक्टर से) जरूरी है। डॉक्टरों को प्रतिष्ठा का नुकसान होता है, जिसकी भरपाई संभव नहीं।
मृतक महिला के पति ने शिकायत दर्ज करवाई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनकी गर्भवती पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर 1 जनवरी 2015 की रात को भीखीविंड स्थित धवन नर्सिंग होम में भर्ती करवाया गया था। डाक्टरों ने पहले सामान्य प्रसव का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में सर्जरी की गई, जिसके बाद उन्होंने जुड़वां बेटियों को जन्म दिया।
आरोप है कि प्रसव के बाद महिला को अत्यधिक रक्तस्त्राव हुआ, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई और उसे दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डाक्टरों ने कथित तौर पर बताया कि सर्जरी ठीक से नहीं की गई थी। अंततः 5 जनवरी 2015 को उसकी मृत्यु हो गई और शिकायतकर्ता ने उसकी मृत्यु का कारण डाक्टरों की कथित लापरवाही को बताया।

न्यायालय ने यह कहते हुए कि क्षेत्राधिकार मैजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्य याचिकाकर्त्ताओं की ओर से चिकित्सा लापरवाही और जल्दबाजी के आरोपों का समर्थन करने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त नहीं हैं, शिकायत और कार्रवाई को रद्द कर दिया।
- खबर का असर : बेटे के इलाज को लेकर चिंतित किसान पिता को मिली बड़ी राहत, सीएम साय ने स्वीकृत किए 12 लाख रुपए
- भोलेनाथ चलाएंगे भाप इंजन, गणपति बनेंगे गार्ड! विदिशा के मोहनगिरी तिराहे पर दिखेगी अनोखी झांकी
- UP Scholarship Big Update: योगी सरकार का बड़ा फैसला, बढ़ी छात्रवृत्ति आवेदन की समय-सीमा
- WhatsApp पर परिचित की DP लगाकर पैसे मांग रहे साइबर ठग, कैथल पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
- नाक से खून, टूटे पैर और जिस्म पर घाव… लिव-इन पार्टनर की लाश छोड़ रातों-रात गायब हुई प्रेमिका, जानें मामला

