Punjab And Jammu Kashmir Dispute On Ranjit Sagar Dam: रणजीत सागर बांध और शाहपुर कंडी परियोजना को लेकर एक बार फिर पंजाब और जम्मू-कश्मीर में तकरार बढ़ गया है। रणजीत सागर बांध और शाहपुर कंडी परियोजना में हाइड्रोपॉवर के बंटवारे और वित्तीय देनदारियों को लेकर दोनों राज्यों में ठन गई है। अब इस लेकर जम्मू-कश्मीर सीएम उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) को 1979 का समझौता याद दिलाई है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वह मुद्दे को पंजाब के मुख्यमंत्री के सामने उठाएंगे। हमारे हक की अनदेखी नहीं की जा सकती है।
दरअसल शाहपुर कंडी बांध रणजीत सागर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा एक डाउनस्ट्रीम प्रोजेक्ट है। ये दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों का विषय रहा है। हालांकि, जल-बंटवारे से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए पूर्व में समझौते किए गए हैं, फिर भी बिजली-बंटवारे और वित्तीय दायित्व का प्रश्न अभी भी विवादित बना हुआ है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री दोनों परियोजनाओं में अपने हिस्से की मांग कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में विधानसभा में कहा कि वह रणजीत सागर बांध के मुद्दे को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने उठाएंगे। जम्मू-कश्मीर के 20% के हिस्से और पुनर्वास से जुड़ी प्रतिबद्धताओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री दोनों परियोजनाओं में अपने हिस्से की मांग कर रहे हैं तो वहीं इधर पंजाब ने भी अपनी डिमांड सामने रख दी है। पंजाब ने जम्मू-कश्मीर के जल शक्ति विभाग को एक लेटर लिखकर, इन दो परियोजनाओं के निर्माण के लिए अपने बकाया हिस्से के तौर पर 973.44 करोड़ रुपये की मांग की है। इसमें से 301.02 करोड़ रुपये रंजीत सागर बांध में जम्मू-कश्मीर के हिस्से के तौर पर और 672.42 करोड़ रुपये शाहपुर कंडी बांध परियोजना के निर्माण के लिए मांगे गए हैं।
क्या है 1979 का वो समझौता?
उमर अब्दुल्ला ने 1979 के समझौते की याद नहीं दिलाई है। उन्होंने इस महीने की शुरुआत में भी इस मुद्दे को उठाया था, तब उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सरकार के बीच 1979 का समझौता एक संप्रभु प्रतिबद्धता है, जिसका पूरी निष्ठा और भावना के साथ सम्मान किया जाना चाहिए और उसे पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर और पंजाब के बीच 1979 का एग्रीमेंट रणजीत सागर डैम और शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट्स के कंस्ट्रक्शन के बारे में एक सॉवरेन पैक्ट है। इसमें कहा गया है कि J-K को बस बार कॉस्ट पर बनी कुल बिजली का 20% मिलेगा और कंस्ट्रक्शन से प्रभावित J-K के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा।
समझौते के अहम प्वाइंट्स
- J-K रणजीत सागर बांध और शाहपुर कंडी बैराज पर उत्पादित कुल बिजली का 20% पाने का हकदार है।
- अप्रैल 2026 तक ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण J-K को यह बिजली नहीं मिल रही है। हालांकि 2019 में बिजली बिक्री का समझौता किया गया था।
- कुल लगभग 85.48 करोड़ रुपये में से पंजाब सरकार ने 71.15 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं, जबकि शेष बकाया राशि पर अभी भी चर्चा चल रही है।
- इस समझौते में जम्मू-कश्मीर के 800 से अधिक प्रभावित परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के प्रावधान शामिल है, जिन पर जम्मू-कश्मीर सरकार वर्तमान में काम कर रही है।
जम्मू-कश्मीर की मांग क्या है
जम्मू-कश्मीर की मांग इस दावे पर आधारित है कि बांध के जलाशय और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे के कुछ हिस्से उसके क्षेत्र में आते हैं। इसके चलते वह बिजली से होने वाले लाभ में एक हिस्से का हकदार है। हालांकि, पंजाब ने इसका कड़ा विरोध किया है। पंजाब सरकार के अधिकारियों ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर को मुफ्त बिजली का कोई भी आवंटन इस शर्त पर निर्भर होगा कि केंद्र शासित प्रदेश इन परियोजनाओं में आर्थिक रूप से योगदान दे।
मुआवजे की कुल राशि 85.48 करोड़ रुपये
परियोजना से प्रभावित परिवारों को मुआवजे के मामले में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मुआवजे की कुल राशि 85.48 करोड़ रुपये है, जिसमें से पंजाब सरकार ने 71.15 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं और 14.32 करोड़ रुपये की राशि अभी भी बकाया हैं। हालांकि, 20 जनवरी 1979 को पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच हुए समझौते के खंड 1 का हवाला देते हुए, पंजाब ने यह बताया है कि इसके अनुसार, परियोजना की कुल लागत का 10% हिस्सा (सिंचाई के हिस्से के तौर पर) जम्मू-कश्मीर को पंजाब को देना था।
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