चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति में सामान्य काउंसलर के पद के लिए कानून की डिग्री यानी एलएलबी को अनिवार्य किए जाने को चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिका तीन सामान्य काउंसलरों की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक वे वर्ष 2024 से हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति के साथ अनुबंध के आधार पर काउंसलर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उनकी नियुक्ति के समय इस पद के लिए मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री को पर्याप्त योग्यता माना गया था।

नई अधिसूचना में जोड़ी गई एलएलबी की योग्यता

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 4 अगस्त को जारी नई अधिसूचना में काउंसलर पद की योग्यता में बदलाव किया गया है। अब मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ कानून में स्नातक यानी एलएलबी की डिग्री भी अनिवार्य कर दी गई है।

तीनों याचिकाकर्ताओं के पास मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री है, लेकिन उनके पास एलएलबी की डिग्री नहीं है। ऐसे में नई योग्यता लागू होने के बाद उनकी मौजूदा सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है।

अदालत में उठाया योग्यता की तर्कसंगतता का सवाल

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि सामान्य काउंसलर के पद के लिए मनोविज्ञान और कानून, दोनों विषयों में डिग्री को अनिवार्य करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि वे निर्धारित पुरानी योग्यता के आधार पर नियुक्त हुए थे और लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

अब हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति को नोटिस जारी होने के बाद अदालत के सामने यह सवाल है कि काउंसलर के पद के लिए एलएलबी की अतिरिक्त योग्यता अनिवार्य करना नियमों और पद की जरूरतों के अनुरूप है या नहीं। मामले में समिति के जवाब के बाद अदालत इस मुद्दे पर आगे सुनवाई करेगी।