चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जारी उथल-पुथल के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के सामने अस्तित्व का संकट गहरा गया है। पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे और बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी नेतृत्व अब डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। इस राजनीतिक भूचाल के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार बैठकों का दौर चला रहे हैं। राज्यसभा सांसदों के बागी होने से पार्टी को लगे बड़े झटके के बाद, अब आम आदमी पार्टी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है।

आगामी 29 अप्रैल को जालंधर में पार्टी के सभी विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आप के वरिष्ठ नेता व प्रभारी मनीष सिसोदिया विशेष रूप से शामिल होंगे। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति तैयार करना और राज्यसभा में हुए इस बड़े फेरबदल के बाद कार्यकर्ताओं में जोश भरना है। मुख्यमंत्री भगवंत मान आज बेहद व्यस्त रहने वाले हैं।

वे आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे, जिसमें वे किसी बड़े मुद्दे या राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर अपनी बात रख सकते हैं।

राज्यसभा में बदला गणित, AAP के पास बचे सिर्फ 3 सांसदपिछले सप्ताह आम आदमी पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगा जब राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, विक्रम साहनी, राजेंद्र गुप्ता और दिल्ली से राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया।

इस्तीफा देने वाले सांसदों ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से भटक गई है। वहीं, राज्यसभा चेयरमैन सी.पी. राधाकृष्णन ने इस बागी गुट के बीजेपी में विलय को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही बीजेपी की राज्यसभा में ताकत बढ़कर 113 हो गई है, जबकि आम आदमी पार्टी के पास अब मात्र 3 सांसद ही बचे हैं। इस्तीफा देने वाले 7 में से 6 सांसद पंजाब से थे।