मलकानगिरी। ओडिशा के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आउटसोर्सिंग के जरिए हो रही भर्तियों में बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी और धांधली के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन और विभिन्न पैरामेडिकल कर्मचारियों की नियुक्तियां निजी एजेंसियों के माध्यम से कराई जा रही हैं। आरोप है कि इन नौकरियों को पाने के लिए उम्मीदवारों से मोटी रकम ऐंठी जा रही है।
मलकानगिरी समेत राज्य के विभिन्न जिलों से लगातार ऐसी शिकायतें मिलने के बावजूद आउटसोर्सिंग से नियुक्तियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी अस्पतालों में पैरामेडिकल स्टाफ से लेकर सुरक्षाकर्मियों और सफाई कर्मचारियों तक की भर्ती की जिम्मेदारी वर्षों से निजी कंपनियों को सौंपी जाती रही है।
अप्रैल में निकला था टेंडर, अब उठे रिश्वत के आरोप
ताजा मामला मलकानगिरी जिले का है, जहां फिजियोथेरेपिस्ट, मेडिकल रिकॉर्ड कीपिंग असिस्टेंट, लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट जैसे पदों को भरने के लिए अप्रैल महीने में टेंडर आमंत्रित किया गया था। यह टेंडर भुवनेश्वर की एक निजी एजेंसी ने हासिल किया। अब उम्मीदवारों का आरोप है कि दस्तावेजों के सत्यापन (Document Verification) के नाम पर उनसे भारी रिश्वत की मांग की जा रही है।
पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
मलकानगिरी जिले में आउटसोर्सिंग भर्तियों में भ्रष्टाचार का यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले हैं, जब धांधली की शिकायत मिलने पर टेंडर रद्द किए गए और कंपनी के कर्मचारी जेल तक गए। यहां तक कि बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त भी किया जा चुका है। हाल ही में सुरक्षाकर्मियों की भर्ती में भी भारी लेन-देन के आरोप मलकानगिरी के विधायक ने लगाए थे।
शिकायत मिलने पर कार्रवाई का आश्वासन
इस पूरे विवाद पर कार्यवाहक सीडीएमओ (CDMO) का कहना है कि यदि अभ्यर्थी लिखित शिकायत दर्ज कराते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार जहां एक तरफ आउटसोर्सिंग व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म करने और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाने की बात करती रही है। वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निजी एजेंसियों के जरिए लगातार हो रही नियुक्तियों ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभिन्न संगठनों और बुद्धिजीवियों ने स्वास्थ्य सेवाओं में जारी इस निजीकरण और भ्रष्टाचार की कड़े शब्दों में निंदा की है।
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