रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हेमंत सोरेन सरकार और जेएमएम-कांग्रेस-राजद गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राज्य में कथित अवैध खनन, राजस्व संग्रह, डीएमएफटी फंड और कोयला उत्पादन को लेकर सरकार से कई सवाल किए।

रघुवर दास ने आरोप लगाया कि मौजूदा गठबंधन सरकार के कार्यकाल में कोयला, बालू और पत्थर का कथित सिंडिकेट सक्रिय है। उन्होंने कहा कि जिस झारखंड में कभी जल, जंगल और जमीन के अधिकार की लड़ाई होती थी, आज उसे लूट का अड्डा बना दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि अवैध खनन के कारण सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है और खनन प्रभावित इलाकों का विकास भी प्रभावित हो रहा है।

MMDR कानून को बताया झारखंड के हित में

पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र के MMDR संशोधन कानून को राज्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इससे वैध खनन को बढ़ावा मिलेगा और अवैध खनन पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। उनका आरोप है कि कथित अवैध खनन से जुड़े लोगों को इस कानून से परेशानी हो रही है, इसलिए इसका विरोध किया जा रहा है।

11 हजार करोड़ के सेस पर सरकार से मांगा जवाब

रघुवर दास ने राज्य सरकार द्वारा लगाए गए सेस को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार 11 हजार करोड़ रुपये के सेस को लेकर केंद्र पर सवाल उठा रही है, लेकिन खनन से मिलने वाले अन्य राजस्व और फंड का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, इसका भी जवाब देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र से मिलने वाले टैक्स और वैधानिक भुगतान का बड़ा हिस्सा राज्यों को मिलता है। इसके अलावा डीएमएफटी के माध्यम से भी खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है।

ओडिशा का उदाहरण देकर सरकार को घेरा

रघुवर दास ने पड़ोसी राज्य ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां खनन क्षेत्र से करीब 7 हजार करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ है। उन्होंने सवाल किया कि खनिज संपदा में समृद्ध होने के बावजूद झारखंड इस मामले में पीछे क्यों है।

30 कोल ब्लॉक में सिर्फ 4 चालू होने का दावा

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि केंद्र से मंजूरी मिलने के बावजूद करीब 30 कोल माइनिंग ब्लॉक में से केवल चार ही चालू हो सके हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि अगर खनन से राजस्व बढ़ाना है, तो लंबित कोल ब्लॉकों को शुरू करने की दिशा में तेजी क्यों नहीं दिखाई जा रही।

डीएमएफटी फंड को लेकर भी निशाना

रघुवर दास ने धनबाद, हजारीबाग, रामगढ़ और पाकुड़ समेत खनन प्रभावित जिलों में डीएमएफटी फंड के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि करीब 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च नहीं हो सकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी राशि उपलब्ध होने के बावजूद खनन प्रभावित लोगों को इसका पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा है।

कोयला उत्पादन घटने का भी किया जिक्र

रघुवर दास ने कोयला उत्पादन के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि वर्ष 2024 में करीब 44 मिलियन टन उत्पादन हुआ था, जो 2025-26 में घटकर करीब 37 मिलियन टन रह गया। उन्होंने इसके लिए सेस और कथित अवैध खनन को जिम्मेदार बताया।

संथाल में पेयजल और निवेश के मुद्दे पर घेरा

पूर्व मुख्यमंत्री ने संथाल परगना में पेयजल व्यवस्था को लेकर भी हेमंत सोरेन सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के क्षेत्र में भी लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है। साथ ही उन्होंने सरकार के निवेश संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि रोड शो के बावजूद झारखंड में अपेक्षित निवेश नजर नहीं आ रहा है।रघुवर दास ने सरकार से खनन, राजस्व, डीएमएफटी फंड, कोयला उत्पादन और निवेश के मुद्दे पर जनता के सामने जवाब रखने की मांग की।