लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्र की मोदी सरकार पर देश में “दो अलग-अलग सिस्टम” चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक व्यवस्था मुट्ठी भर अरबपतियों के लिए है, जबकि दूसरी आम जनता के लिए।

राहुल गांधी ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) पर सवाल उठाते हुए इसे “नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक और वित्तीय संस्थान आम नागरिकों से कर्ज वसूलने में सख्ती दिखाते हैं, लेकिन कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के मामलों में नरमी बरती जाती है।

उनकी यह टिप्पणी NCLT द्वारा कथित तौर पर 22,000 करोड़ रुपये के डिफॉल्ट लोन का 99.97% हिस्सा माफ कर महज 6.5 करोड़ रुपये में सेटलमेंट किए जाने के बाद आई।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि किसान 50 हजार रुपये का कर्ज नहीं चुका पाता तो उसकी जमीन नीलाम हो जाती है। वहीं, एक EMI न चुकाने पर वेतनभोगी व्यक्ति के घर बैंक एजेंट पहुंच जाते हैं। उन्होंने कहा कि गरीब छात्रों को शिक्षा ऋण हासिल करने में भी मुश्किल होती है, जबकि “खास दोस्तों” के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

कांग्रेस ने ‘हेयरकट’ पर उठाए सवाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कर्ज में भारी कटौती को “सिर्फ हेयरकट नहीं, बल्कि मुंडन” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे फैसले इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 का मजाक बनाते हैं।

वहीं, कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने वित्त मंत्री से पिछले 12 वर्षों में NCLT के जरिए हुए कुल “हेयरकट” का आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि यह राशि 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।

सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि 50, 60, 70, 80, 90 और अब 99 फीसदी तक “हेयरकट” कैसे दिया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि हेयरकट के नाम पर उद्योगपतियों के बड़े कर्ज को माफ किया जा रहा है।

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