आशुतोष द्विवेदी, रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा में बारिश ने ऐसी तबाही मचाई की सभी लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। इस बाढ़ का शिकार न सिर्फ आम जनता बल्कि माननीय भी हुए। एक तरफ भाजपा विधायक का मकान पानी में घिर गया और परिवार घर में ही फंस गया। वहीं त्योंथर में 309 गांव प्रभावित हो गए जिससे 6 हजार से ज्यादा घरों में पानी घुस गया।  

भाजपा विधायक का मकान पानी में घिरा, परिवार घर में फंसा नदी किनारे निर्माण पर उठे सवाल

रीवा में लगातार हो रही बारिश ने शहर की तस्वीर बदल दी है। बीहर नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नदी किनारे बसे इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं। इसी बीच गुढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह का मकान भी पानी से घिर गया। बताया जा रहा है कि विधायक अपने परिवार के साथ बीती रात से घर में ही मौजूद हैं। मकान के निचले हिस्से में पानी भर चुका है और अब ऊपरी हिस्से की ओर भी पानी बढ़ने लगा है।

सुबह से लगातार बढ़ता गया पानी

विधायक के घर के कर्मचारी और केयरटेकर रामार्चन चौरसिया के मुताबिक, सुबह करीब 5 बजे से मकान में पानी भरना शुरू हुआ। इसके बाद पानी लगातार बढ़ता गया। मकान की पहली मंजिल पूरी तरह पानी में डूब गई, जहां रखा सामान पानी में तैरता नजर आया। केयरटेकर के अनुसार विधायक और उनका परिवार फिलहाल दूसरी मंजिल पर है। लगातार बढ़ते पानी के कारण घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।

लगातार बारिश से शहर में जलभराव

कुछ घंटों की तेज बारिश ने रीवा शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा कर दी है। कई सड़कें पानी में डूब गईं, जबकि निचले इलाकों में लोगों के आवागमन पर भी असर पड़ा है। बीहर नदी के आसपास जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन और नगर निगम के सामने जल निकासी के साथ-साथ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की चुनौती बढ़ गई है।

कांग्रेस ने लगाए अतिक्रमण के आरोप

विधायक के मकान में पानी भरने के बाद नदी किनारे निर्माण को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आ गया है। कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. विनोद शर्मा ने आरोप लगाया कि विधायक का मकान नदी क्षेत्र में अतिक्रमण की सीमा में आता है। कांग्रेस ने शहर में जलभराव से निपटने के लिए नगर निगम की तैयारियों पर भी सवाल उठाए और पूरे मामले की जांच की मांग की।

विधायक का जवाब—निगम से ली थी निर्माण की अनुमति

वहीं, भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह ने नदी की जमीन पर कब्जे के आरोपों को खारिज किया है। विधायक का कहना है कि जमीन वैध तरीके से खरीदी गई थी और निर्माण के समय नगर निगम के संबंधित अधिकारियों से अनुमति ली गई थी। विधायक ने यह भी कहा कि यदि उस समय अधिकारियों की ओर से किसी तरह की गलत स्वीकृति दी गई थी, तो इसकी जिम्मेदारी उनकी नहीं हो सकती।

नदी के प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण को लेकर सवाल

मामले में अधिवक्ता वीके माला ने भी नदी के नजदीक निर्माण को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मकान नदी के प्रतिबंधित क्षेत्र में बनाया गया है। अधिवक्ता ने तटीय और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए कहा कि केवल जमीन की रजिस्ट्री या निजी स्वामित्व होने से नदी क्षेत्र में निर्माण का अधिकार नहीं मिल जाता। निर्माण के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी की अनुमति जरूरी होती है।

जांच और सीमांकन की मांग

अधिवक्ता ने मामले में राजस्व रिकॉर्ड की जांच, जमीन का आधिकारिक सीमांकन और निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई, इसकी जांच की मांग की है। साथ ही नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है। फिलहाल लगातार बारिश और बीहर नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच विधायक का मकान पानी से घिरा हुआ है। वहीं, नदी किनारे निर्माण को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रशासनिक जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

त्योंथर में बाढ़ का तांडव! 309 गांव प्रभावित, 6 हजार से ज्यादा घरों में घुसा पानी

रीवा जिले के त्योंथर क्षेत्र से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। टमस नदी के उफान पर आने से इलाके में बाढ़ के हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। करीब 309 गांव बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं, जबकि 6 हजार से ज्यादा घरों में पानी घुस गया है। निचले इलाकों में कई जगह दो से चार फीट तक पानी भरने से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है।

बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। क्षेत्रीय विधायक सिद्धार्थ तिवारी, कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी और पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरुकरण सिंह ने मोटरबोट के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। अधिकारियों ने मोहवा-शकरपुर, पचमठ और बसहोर बस्ती पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और राहत व्यवस्था का निरीक्षण किया।

प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए 16 राहत शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में अब तक 169 से अधिक लोगों को सुरक्षित पहुंचाया गया है। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, बिजली और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था की गई है।

प्रशासन का कहना है कि पानी उतरने के बाद प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। इसके आधार पर प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत और मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही राशन और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए संबंधित विभागों की टीमें लगातार काम कर रही हैं।

बाढ़ का पानी कम होते ही संभावित संक्रमण और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए दवा का छिड़काव, साफ-सफाई और स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया जाएगा। फिलहाल प्रशासन और राहत टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित लोगों तक हर संभव मदद पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m