रोहित कश्यप, मुंगेली। जिले के चर्चित रेन्बो मेमोरियल इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल में प्रबंधन को लेकर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। स्कूल संचालन, वैधानिक अधिकार और वित्तीय लेन-देन को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। एक तरफ छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन (CDBE) के पदाधिकारियों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए स्कूल पर कब्जा, प्राचार्य से मारपीट, जान से मारने की धमकी और फीस गबन जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए FIR की मांग की है।

वहीं, दूसरे पक्ष यानी वर्तमान स्कूल प्रबंधन ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खुद को वैधानिक रूप से नियुक्त प्रबंधन बताया है। विवाद बढ़ने के बाद अब मामला प्रशासन और पुलिस तक पहुंच गया है, जबकि पूरे घटनाक्रम ने विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता भी बढ़ा दी है।

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CDBE प्रबंधन की ओर से प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया गया कि संदीप लाल, संगीता लाल और उनके सहयोगियों ने पुराने लेटरहेड और कथित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर स्कूल प्रशासन पर अवैधानिक नियंत्रण स्थापित कर लिया है।

“प्राचार्य कक्ष का ताला तोड़कर कब्जा किया गया”

CDBE प्रबंधन का दावा है कि स्कूल की वैधानिक प्रभारी प्राचार्य केवल सोफिया जे. हैरिसन हैं। आरोप है कि उनकी अनुपस्थिति में प्राचार्य कक्ष का ताला तोड़कर कब्जा कर लिया गया और संगीता लाल स्वयं को प्राचार्य बताकर स्कूल का संचालन कर रही हैं।

प्रबंधन ने यह भी आरोप लगाया कि विद्यार्थियों की मार्कशीट और प्रमाणपत्रों में कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर किए जा रहे हैं, जिससे सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

शिकायत के मुताबिक 8 अक्टूबर 2025 को विद्यालयीन समय में कुछ लोग जबरन प्राचार्य कक्ष में घुस गए, जिससे स्कूल परिसर में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया।

“प्राचार्य के साथ धक्का-मुक्की और जान से मारने की धमकी”

विद्यालय प्रबंधन ने आरोप लगाया कि जब प्रभारी प्राचार्य सोफिया जे. हैरिसन स्कूल पहुंचीं तो उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। साथ ही उन्हें जान से मारने और हाथ-पैर काट देने जैसी गंभीर धमकियां भी दी गईं। प्रबंधन ने इसे शिक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर सीधा हमला बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

फीस, PF और स्कूल फंड में गड़बड़ी के आरोप

CDBE प्रबंधन ने स्कूल की वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि विद्यार्थियों से सात महीने तक फीस वसूली जाती रही, लेकिन राशि स्कूल के आधिकारिक बैंक खाते में जमा नहीं कराई गई।

इसके अलावा कर्मचारियों के PF और ESIC की राशि जमा नहीं होने, स्कूल वाहन फोर्स ट्रैवलर की EMI लंबित रहने और पेट्रोल पंपों का भुगतान नहीं किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।

प्रबंधन ने पूरे मामले की स्वतंत्र ऑडिट और वित्तीय जांच कराने की मांग की है।

“प्रशासनिक आदेश को नहीं मानता”

प्रेसवार्ता में दावा किया गया कि 25 जनवरी 2026 को प्रशासनिक आदेश के तहत स्कूल का कार्यभार संभालने पहुंचे प्रतिनिधियों को स्कूल परिसर में प्रवेश से रोक दिया गया। आरोप है कि इस दौरान कहा गया- “मैं किसी आदेश को नहीं मानता।”

प्रबंधन का कहना है कि यह प्रशासनिक आदेशों की खुली अवहेलना है।

CDBE ने वैधानिक प्रक्रिया का दिया हवाला

CDBE प्रबंधन के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन ने 1 दिसंबर 2025 को रायपुर कलेक्टर को संस्था का प्रशासक नियुक्त किया था। इसके बाद 27 मार्च 2026 को कलेक्टर कार्यालय रायपुर में संस्था का वैधानिक चुनाव कराया गया, जिसमें Rt. Rev. सुषमा कुमार को अध्यक्ष पदेन और नितिन लॉरेंस को उपाध्यक्ष चुना गया।

प्रबंधन का दावा है कि इसी प्रक्रिया के तहत संस्था और उसके अधीन संचालित 19 विद्यालयों को वैधानिक मान्यता प्राप्त है।

दूसरे पक्ष ने आरोपों को बताया निराधार

वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से आयोजित प्रेसवार्ता में सभी आरोपों को खारिज किया गया। संगीता लाल ने दावा किया कि उन्हें वर्ष 2022 की पुनर्जीवित समिति द्वारा विधिवत इंचार्ज प्रिंसिपल नियुक्त किया गया था और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही उन्हें कार्यभार सौंपा गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व प्राचार्य सोफिया जे. हैरिसन और तत्कालीन स्कूल मैनेजर महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड अपने साथ ले गए, जिससे स्कूल संचालन और बैंकिंग व्यवस्था प्रभावित हुई।

संगीता लाल ने यह भी कहा कि समिति और चुनाव प्रक्रिया को लेकर मामला न्यायालय में लंबित है।

विद्यार्थियों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता

स्कूल प्रबंधन को लेकर जारी इस विवाद ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की चिंता बढ़ा दी है। अब पूरे मामले में पुलिस और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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